

हरिद्वार में जिला पूर्ति कार्यालय की आमदनी एक करोड रुपए महीना से भी अधिक हो सकती है जनपद में साढे 750 के करीब राशन की दुकानें हैं प्रति राशन की दुकान ₹5000 से लेकर ₹15000 तक प्रति माह जिला पूर्ति कार्यालय को सुविधा शुल्क के रूप में राशन दुकानदारों को देना होता है यह धनराशि पूर्ति निरीक्षक द्वारा एकत्र की जाती है हरिद्वार में पूर्ति निरीक्षक हरिद्वार से रुड़की के पूर्ति निरीक्षक रुड़की से मैंगलोर के पूर्ति निरीक्षक मंगलौर से लक्सर के पूर्ति निरीक्षक लक्सर से या यह कहे जनपद में जहां-जहां राशन की दुकानें हैं उन सभी जगह से उस क्षेत्र के पूर्ति निरीक्षक यह धनराशि दुकानदारों से वसूलते हैं इस धनराशि में से आधी धनराशि साहब को दी जाती है और आधी धनराशि में से पूर्ति निरीक्षक व जिला पूर्ति कार्यालय का स्टाफ बांट लेता है इसके अलावा गैस एजेंसीयो व पेट्रोल पंप वालों से अलग प्रतिमा एक मुस्त धनराशि सुविधा शुल्क के रूप में जिला पूर्ति कार्यालय को प्राप्त होती है यह सुविधा शुल्क इसलिए लिया जाता है कि चाहे राशन की दुकान हो या गैस एजेंसी हो या पेट्रोल पंप हो सभी निर्भीक होकर मनमर्जी कार्य करें किसी को कोई परेशानी नहीं होगी किसी दुकानदार या पेट्रोल पंप वाले की शिकायत मिलने पर उसके लिए पूर्ति कार्यालय को अतिरिक्त सुविधा शुल्क देना होता है । उसके बाद भी इस कार्यालय के साहब का पेट नही भरता है।और उगाही के नए नए तरीके इजाद करते रहते है।


हरिद्वार भेल नगरी यानी की BHELएवम् शिवालिक नगर में जितने भी NFSA और अंत्योदय के राशनकार्ड हैं वह सब राशन कार्ड अपात्र लोगों के बने हुए हैं।यह सब राशन कार्ड वहां जो राशन की दुकान के विक्रेता है उन्होंने अपने पास रखे हैं और जिनके नाम यह कार्ड जारी हैं उनको एपीएल यानी पीले कार्ड दफ्तर से बनवा कर दे रखे हैं।ये दुकानदार प्रतिमाह कार्डधारक को फोन करके बुलाते हैं कि आप आकर अपना राशन कार्ड चढ़वा लो अंगूठा लगा जाओ अन्यथा आपका राशन कार्ड कैंसिल हो जाएगा।इन सभी दुकानदारों ने एक वयक्ति को दैनिक वेतन पर रखा है जो पूरे दिन लोगों को फोन कर कर दुकान पर बुलाता है और अंगूठे लगवाता है इसकी बड़े स्तर पर यदि जांच हो तो सब सामने आ जाएगा NFSA और अंत्योदय के राशन कार्ड का एक भी हकदार भेल और शिवालीक नगर में नहीं है ।ग्राहकों को तो ये भी नहीं मालूम की उनका किस योजना का कार्ड बना है। यह माल सीधे-सीधे राशन दुकानदारों को मिलता है।जिसको यह बाजार में बेच देते हैं और पूरे महीने दुकानें नहीं खोलते हैं। जिलाधिकारी को चाहिए की इस घोटाले की जांच कराएं। लेकिन जिला पूर्ति कार्यालय के घाग पूर्ति निरीक्षकओ से दूरी रखते हुए।

