देहरादून।
अमित श्रीवास्तव
दिव्यांग व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास करने चाहिए: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति तपोवन और राष्ट्रपति निकेतन क्रमशः 24 जून और 1 जुलाई से आम जनता के लिए खुले रहेंगे
देहरादून। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देहरादून में राष्ट्रपति तपोवन और राष्ट्रपति निकेतन के उद्घाटन समारोह में भाग लिया । उन्होंने आगंतुक सुविधा केंद्र, कैफेटेरिया और स्मारिका दुकान सहित सार्वजनिक सुविधाओं का भी उद्घाटन किया और राष्ट्रपति निकेतन में राष्ट्रपति उद्यान की आधारशिला रखी। उन्होंने कल (19 जून, 2025) राष्ट्रपति निकेतन में एक एम्फीथिएटर का भी उद्घाटन किया।

इस मौके ओर राज्यपाल ले.जनरल गुरमीत सिंह, सीएम पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव व डीजीपी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून में राजपुर रोड पर स्थित राष्ट्रपति तपोवन, हिमालय की तलहटी में बसा 19 एकड़ का राष्ट्रपति भवन है, जो आध्यात्मिक विश्राम और पारिस्थितिकी संरक्षण पर जोर देता है। देशी वनस्पतियों से समृद्ध एक घना जंगल, तपोवन में 117 पौधों की प्रजातियाँ, 52 तितलियाँ, 41 पक्षी प्रजातियाँ और 7 जंगली स्तनधारी हैं, जिनमें कुछ संरक्षित प्रजातियाँ भी शामिल हैं। इस क्षेत्र में प्राकृतिक बाँस के बाग़ और अछूते वुडलैंड पारिस्थितिकी तंत्र हैं।

राष्ट्रपति निकेतन की स्थापना 1976 में राष्ट्रपति निवास के रूप में की गई थी। इसकी समृद्ध विरासत 1838 से चली आ रही है, जब यह एस्टेट गवर्नर जनरल के अंगरक्षक के लिए ग्रीष्मकालीन शिविर के रूप में काम करता था। यह 21 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें लिली तालाब, ऐतिहासिक इमारतें, बाग और अस्तबल शामिल हैं।
राष्ट्रपति उद्यान, 132 एकड़ का सार्वजनिक पार्क, सुगमता और पारिस्थितिकी जिम्मेदारी का एक मॉडल होगा – एक नेट-जीरो सार्वजनिक पार्क, जो दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह से सुलभ होगा। इसका उद्देश्य नागरिकों के बीच स्वास्थ्य, संस्कृति और नागरिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक सहभागिता केंद्र बनना है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति निकेतन, राष्ट्रपति तपोवन और राष्ट्रपति उद्यान की जैव विविधता पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इस पुस्तक में राष्ट्रपति निकेतन, तपोवन और उद्यान की 300 से अधिक वनस्पतियों और 170 से अधिक जीवों की प्रजातियों का विवरण है, जिनमें तितलियाँ, पक्षी और स्तनधारी शामिल हैं।
राष्ट्रपति तपोवन और राष्ट्रपति निकेतन क्रमशः 24 जून और 1 जुलाई, 2025 से आम जनता के लिए खुले रहेंगे।
राष्ट्रपति ने देहरादून में राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान का दौरा किया और छात्रों से बातचीत की। उन्होंने मॉडल स्कूल विज्ञान प्रयोगशाला और कंप्यूटर लैब के साथ-साथ एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश या समाज की प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समाज में लोग दिव्यांग व्यक्तियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।
भारत का इतिहास संवेदनशीलता और समावेशिता की प्रेरक घटनाओं से भरा पड़ा है। हमारी संस्कृति और सभ्यता में मानवीय करुणा और प्रेम के तत्व हमेशा मौजूद रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुगम्य भारत अभियान के माध्यम से, जो एक सुलभ भौतिक वातावरण, परिवहन, सूचना और संचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर देता है, सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समान भागीदारी के लिए प्रयास कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज का युग विज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग है। उन्नत प्रौद्योगिकी की मदद से दिव्यांग व्यक्ति भी मुख्यधारा में अपना योगदान दे सकते हैं। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान समावेशी शिक्षा प्रणाली और नवीनतम तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि समाज को जीवन के हर क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास करने चाहिए।
*राष्ट्रपति भवन में दिव्यांगजनों के हित में अनेक कदम उठाए जा रहे: मुर्मू*
दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए समर्पित इस संस्थान में आप सब के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। दृष्टिबाधित लोगों को शिक्षण तथा प्रशिक्षण प्रदान करने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ समाज को उनके प्रति जागरूक बनाने में योगदान के लिए मैं इस संस्थान से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं।
किसी देश या समाज की प्रगति का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समाज के लोगों द्वारा दिव्यांगजनों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। भारत का इतिहास संवेदनशीलता एवं समावेशिता के प्रेरक प्रसंगों से भरा पड़ा है। हमारी संस्कृति और सभ्यता में मानवीय करुणा एवं प्रेम के तत्व हमेशा रहे हैं।

