हरिद्वार । दिनेश शर्मा और नरेंद्र शर्मा का कहना है की जिला पूर्ति अधिकारी तेजबल सिंह व पूर्ति निरीक्षक सनवाल काफी रिश्वत मांगते हैं जिसकी हम लोगों ने शिकायतें भी कर रखी हैं और इसी वजह से वह हम लोगों से खुंदक रखते हैं। जिलापूर्ति अधिकारी ने रिश्वतखोरी के आरोपो को नकारा।
हरिद्वार प्रेस क्लब में आज राशन विक्रेता यूनियन के विगत 30 वर्षों से अध्यक्ष चले आ रहे हैं नरेंद्र शर्मा व बहादराबाद ब्लॉक में यूनियन के अध्यक्ष, राशन विक्रेता दिनेश शर्मा का कहना है, के मेरे ऊपर जो भी आरोप लगाए गए हैं, नोटिस में वे सब, बे बुनियाद है ,और यह नोटिस इसलिए दिए जा रहे हैं क्योंकि हम डीएसओ व पूर्ति निरीक्षको की रिश्वतखोरी की शिकायत ऊपर तक करते हैं।
रिश्वत गगन,व राकेश गुप्ता नामक राशन दुकानदारो के माध्यम से जाती है।जो एक करोड़ से अधिक है। असली राशन माफियाओं के नाम नेता जी गोल कर गए।
जब उनसे पूछा गया की यह रिश्वत किसके माध्यम से डीएसओ और पूर्ति निरीक्षक तक पहुंचाई जाती है तो इस पर उन्होंने कनखल के एक राशन विक्रेता गगन का नाम स्पष्ट रूप से बताया और बहादराबाद में राकेश गुप्ता का नाम बताया, इन दो ही लोगों के नाम इन लोगो ने बताएं , जबकि दो असली राशन माफियाओं के नाम नही बताए।
तीन नेता प्रेस करने आये थे,किसी राशन दुकानदार को साथ नही लाये थे,जिससे जिलापूर्ति कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने पैसे मांगे हो।

यह जो तीन लोग नरेंद्र शर्मा , दिनेश शर्मा ,सतेंद्र प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस करने आए थे इन्होंने अपने उन साथियों के जो वर्तमान में असल में राशन माफिया हैं उनके नाम छुपा लिए, कई बार कहने पर की हरिद्वार में कौन है जो इस तरीके के काम करते हैं तब जाकर गगन व राकेश गुप्ता नाम के राशन विक्रेता का नाम बताया ।और राशन विक्रेता यूनियन के 30 साल से अध्यक्ष चले आ रहे हैं नरेंद्र शर्मा के ऊपर जब सच्चाई के सवालों की बौछार हुई तो वह इतने बौखला गए कि वह प्रेस क्लब से प्रेस छोड़कर भागने को तैयार हो गए। जब उनसे खुद इस संवाददाता ने पूछा कि आप पहले जिला पूर्ति अधिकारी के साथ हुआ करते थे , अब आप इस तरीके के आरोप लगा रहे हैं तो ,इस पर वह बोखला गए और उठकर जाने लगे,
सबूत के तौर पर किसी राशन विक्रेता को भी साथ लाना भूल गए।जिसने रिश्वत दी हो।
दो दिन पूर्व देहरादून में खाद्य मंत्री रेखा आर्य द्वारा बुलाई गई बैठक में भी अध्यक्ष जी यही रोना रो आये थे।
अभी हाल ही में इसी प्रकरण को लेकर दो दिन पहले देहरादून में खाद्य मंत्री के सामने भी यही प्रकरण इन अध्यक्ष जी ने उठाया था, वहां खाद्य सचिव, खाद्य आयुक्त व कई सारे अधिकारी थे तो, आज पुनः प्रेस कल्ब में इस प्रेस के हरिद्वार में करने का क्या औचित्य था।
जिलापूर्ति अधिकारी तेजबल सिंह के अनुसार करोना काल का कोई पैसा, किसी भी राशन दुकानदार का शेष नही है।और न ही पैसा देने की एवज में किसी भी दुकानदार से कोई पैसा लिया गया है।
हमने जिलापूर्ति अधिकारी से जब बात की के कोरोना काल के राशन विक्रेताओ के कमीशन के पैसे पर 25 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप आप और आपके अधीनस्त कर्मचारियों पर राशन विक्रेता यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा लगाया जा रहा है।आप इनका पैसा क्यो नही दे रहे है , जिला पूर्ति अधिकारी के अनुसार सारा पैसा दे दिया गया है। किसी प्रकार का कोई कमीशन इनसे नहीं मांगा गया है। यह कमीशन दिए जाने की बात सरासर गलत है। अब यह तो यह दोनों ही लोग जानते होंगे किसने कमीशन दिया, किसने लिया।
नरेंद्र शर्मा को भी सभी राशन विक्रेता अच्छी तरह से जानते है की वे राशन विक्रेताओं के कितने हितैषी है। यह तो जांच का विषय है कि यह राशन विक्रेता किस तरह से कारोबार करते हैं किस तरीके से गरीबों के पेट का राशन, राशन माफियाओं के हवाले करते है।कल तक जिला पूर्ति कार्यालय से सारी समस्याओं का समाधान नरेन्द्र शर्मा ही कराया करते थे। मैंने खुद कई बार अध्यक्ष जी से पूर्ति कार्यालय के अधिकारियों के बारे में सबूत मांगे लेकिन अध्यक्ष जी हर बार टाल मटोल ही कर गए।

