हरिद्वार । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इच्छा है की पूरा राज्य अवैध नशा मुक्त राज्य होना चाहिए जिसके लिए राज्य में कई थानों में शराब ,स्मेक चरस, गांजा पुलिस पकड़ रही है लेकिन हरिद्वार में दूध की डेरी की आड़ में दारू की डेरी पिछले 10 वर्षों से भी अधिक से चल रही थी।
आबकारी विभाग ने इस दारू की डेरी पर छापा मारकर एक शराब विक्रेता को दबोचा है ।साथ ही राणा मोबाइल शॉप पर छापा मारकर बियर की बोतलें पकड़ी यहां से भी एक शराब विक्रेता पकड़ा गया है।
ज्वालापुर के रानीपुर मोड़ पर चलती है शंकर डेरी, जो दूध की नही दारू की डेरी है।
ज्वालापुर थाना क्षेत्र में पडने वाली इस शंकर डेरी के बाहर खड़े दो स्कूटर में से निकाल कर हर ब्रांड की शराब उपलब्ध करा दी जाती है। कोरोना काल में तो इस शराब डेरी ने सारे रिकॉर्डिंग तोड़ दिए थे पूरे शहर में कहीं शराब की बूंद ना मिले लेकिन यहाँ शराब अवश्य मिलती थी ।
एक बोतल जिसकी कीमत 800 रुपए हुआ करती थी वह बोतल यहां से तीन हजार रू तक में लोग खरीद कर अपनी प्यास बुझाया करते थे। ज्वालापुर पुलिस को इस दूध की डेरी की जगह यहां चल रही शराब की डेरी के बारे में पूरी जानकारी थी लेकिन आज तक इसके ऊपर किसी ने हाथ नहीं डाला।

शहर में चप्पे चप्पे पर उपलब्ध है, शराब , चरस ,स्मेक।
शहर के हर गली मोहल्ले व मेन रोड पर शराब बिक रही है।होम डिलीवरी भी है। लेकिन उत्तराखंड को नशा मुक्त राज्य बनाने के लिए हरिद्वार में तमाम बैठक, गोष्ठियों व हस्ताक्षर अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन शराब चरस,स्मेक की यहां धड़ल्ले से बिक्री होती है ।आज ही बहादराबाद पुलिस ने स्मेक का बड़ा जखीरा जिसकी कीमत 3 करोड रुपए बताई जाती है वह पड़ा है। और आए दिन 1 ग्राम 2 ग्राम 4 ग्राम 6 ग्राम स्मेक
के साथ नशा तस्कर पकड़े जा रहे हैं लेकिन यह स्मेक आ कहां से रही है इसके बारे में अभी तक पुलिस कुछ पता नहीं कर पाई है ।केवल इतना होता है कि जिसके पास स्मेक पकड़ी गई उसको पकड़ कर जेल रवाना कर दिया जाता है। वह व्यक्ति इस स्मेक को कहां से ला रहा है इसके बारे में अभी तक किसी बड़े गैंग पर हाथ नहीं पड़ सका है रानीपुर मोड़ की कई दुकानों पर बियर व विदेशी शराब तक उपलब्ध हो जाती है किसी चीज की यहां कोई कमी नहीं है बस थोड़ा पैसा ज्यादा देना पड़ता है। शराब का हर ब्रांड आपके शहर के हर कोने में आराम से उपलब्ध हो जाएगा ।

स्मेक का सेवन कौन, नशे के आदि हो चुके नशेड़ी कर रहे है।
हरिद्वार में पहले चरस का कारोबार ज्यादा हुआ करता था लेकिन अब विगत 5 वर्षों से हरिद्वार में स्मेक का सेवन कौन लोग कर रहे हैं इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इतना जरूर पता चलता है की कुछ स्कूली छात्र इस नशे की चपेट में आ रहे हैं और यह छात्र इन स्मेक के सौदागरों के ग्राहक हैं।
क्योंकि सर्वाधिक चरस की खपत जूना अखाडे में होती है। जूना अखाड़े में साधु संत चिलम का प्रयोग करते हैं। वहां पर स्मैक जैसे नशे का प्रयोग नहीं किया जाता है तो फिर इस नशे को कौन लोग प्रयोग कर रहे हैं और यह नशा कहां से आ रहा है इसकी तरफ पुलिस को देखना होगा।
और कार्यवाही करनी होगी ,और रही शराब की बात तो, हरिद्वार तीर्थ नगरी है यहां दूध व गंगाजल की नदियों के साथ ही दारू की नदियां बह रही है।इस कारोबार को करने वालो के सर पर सत्ता धारी दल के नेताओं का हाथ रहता है।

