29 Mar 2026, Sun

गुरुकुल कांगड़ी में 7 संविदा कर्मियों को परमानेंट करने पर विवाद गहराया। कुलपति हेमलता नियमों के खिलाफ फैसला थोपने पर अड़ी

हरिद्वार । गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में 7 संविदा कर्मचारियों को परमानेंट किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, यूजीसी में बैठे कुछ अपने आकाओं से मिलकर अवैध और नियम विरुद्ध कार्य करने पर अड़ी कुलपति हेमलता अब हठ पर उतर आई हैं।

कई दिनों से चल रहे विवाद के बाद हेमलता ने मंगलवार को कैमरे के सामने आकर अपना पक्ष रखा, उन्होंने बताया कि 2013-14 में यह कर्मचारी अनुबंध पर रखे गए थे। लगातार यूजीसी समय-समय पर उनके वेतन संबंधित अन्य जानकारी के बारे में पूछता रहता है, मेरी नियुक्ति कुलपति पद पर कार्यवाहक के रूप में अगस्त 2024 में हुई और इस पूरे मामले को समझने के लिए मैंने एक हाई पावर कमेटी बनाई है, उनकी स्वीकृति के बाद ही इस मामले को प्रबंधन बोर्ड में ले जाया जाएगा, हालांकि कुलपति ने यह भी माना कि उनके पास यह सब अधिकार नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि मैं कार्यवाहक कुलपति इतने बड़े मामले को कैसे समझ पाऊं, इसे समझने के लिए ही मैने कमेटी बनाई है लेकिन शायद वह यह भूल रही है कि अवैध पावर लेने के लिए उन्होंने सोच समझकर हाई पावर कमेटी का गठन किया है, जबकि कोर्ट के डिसीजन को समझने के लिए विश्वविद्यालय के पास लीगल एडवाइजर भी मौजूद हैं। लेकिन उनकी मंशा साफ दिखाई दे रही है वह साम, दाम दंड ,भेद अपनाकर इन सभी अनुबंध पर रखे हुए कर्मचारियों को परमानेंट करना चाहती हैं।

 

जबकि हाई कोर्ट ने पहले ही इनकी परमानेंट नियुक्ति से इंकार कर दिया है। अब सवाल यह उठता है कि जब यूजीसी द्वारा 14 मार्च 2023 में उपसचिव जितेंद्र के द्वारा विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर स्पष्ट तौर पर कहा है कि कानूनी विवादों के सापेक्ष विश्वविद्यालय में सीधी भर्ती एवं cas प्रोन्नति के मामले न्यायालय का डिसीजन होने तक स्थगित रखें जाएं, यूजीसी का स्पष्ट नियम है कि कोई भी कार्यवाहक कुलपति स्थाई गैर शिक्षण पदों पर कोई नियुक्ति नहीं कर सकता।

 

 

हालांकि यूजीसी का अस्थाई पदों पर नियुक्ति करने के लिए कार्यवाहक कुलपति को स्कैनिंग कमेटी/ चयन समिति का गठन का अधिकार दिया गया है,। बावजूद इसके हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार कर कुलपति अपने बिछाए हुए जाल में फंसती जा रही हैं क्या किसी रिटायर्ड जज ,ias को हाई कोर्ट के फैसले को बदलने का अधिकार प्राप्त है, और जब कार्यवाहक कुलपति को यूजीसी ने कोई अधिकार दिए ही नहीं है तो ऐसे कर्मचारियों जिन्होंने विश्वविद्यालय को हाई कोर्ट में घसीटा ,इनपर कुलपति इतनी मेहरबान क्यों है। बरहाल अब सभी की नजर कल 12 जून को होने वाली अवैध हाई पावर कमेटी की बैठक पर लगी हुई है, यूनिवर्सिटी का एक पक्ष कल होने वाले गोरखपुर से बुलाए जा रहे मेहमानों के फैसले के विरुद्ध कोर्ट की अवमानना बताते हुए हाई कोर्ट जाने को तैयार में बैठा है।

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