हरिद्वार। इस बार राज्य सरकार को भी पूर्व से 1100 करोड रुपए अधिक का मुनाफा हुआ है सरकार के संज्ञान में यह भी होगा की इतना ही मुनाफा खनन माफिया, स्टोन क्रेशर मालिको व राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारियों को भी हुआ है।तीर्थ नगरी हरिद्वार में काफी समय से गंगा का सीना चीरकर स्टोन क्रेशर वाले हो या खनन माफिया हो व राजस्व विभाग व फोरेस्ट की मिली भगत से करोड़ों का खेल प्रतिदिन कर रहे है इस बार राज्य सरकार ने कुछ सख्ती दिखाते हुए खनन के खेल में कुछ नियम परिवर्तित कर कार्य शुरू कराया तो राज्य सरकार को 1100 करोड रुपए की अतिरिक्त आय हुई है। लेकिन राज्य सरकार को शायद यह मालूम है या नहीं की जितनी अतिरिक्त आय राज्य सरकार को हुई है उतनी ही या उससे भी अधिक आए हरिद्वार जनपद में मौजूद स्टोन क्रेशर मालिको व खनन माफियाओं के साथ-साथ राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को हुई है राजस्व विभाग की टीम में पहले जिलाधिकारी और एसडीएम की भी भूमिका हुआ करती थी लेकिन अब इन सभी की भूमिका को दरकिनार करते हुए केवल माइनिंग अफसर व तहसीलदार की रिपोर्ट पर ही शासन किसको कितना पट्टा आवंटित करना है या किसको पट्टा दिया जाना है या नहीं दिया जाना है यह तय करती है पट्टा मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम पट्टे की किलेबंदी कर उसको बता दिया जाता है की पट्टा स्वामी इससे आगे खनन नहीं कर सकेगा लेकिन यह किलेबंदी केवल नाम के लिए होती है यहां पर यह जो पट्टे होते हैं यह पट्टे उन्हें कहा जाता है जो किसान की भूमि गंगा किनारे होती है और वहां पर खेती नहीं होती है और खेती अगर करना भी चाहे तो किसान के खेत में जो रेत और बजरी और बोल्डर एकत्र हो जाता है उसको हटाने की अनुमति के नाम पर पट्टा स्वामी द्वारा खनन करने की अनुमति ले ली जाती है ।

लेकिन किसान के पास खनन करने का कोई अनुभव न होने से के कारण किसान अपना पट्टा खनन माफियाओं और स्टोन क्रशर मालिकों के सुपुर्द कर देता है ।इस पट्टे में खनन करने का भी सरकार का एक नियम है माइनिंग अफसर के अनुसार 3 मीटर से अधिक खुदाई नहीं की जा सकती लेकिन आप मौके पर जाकर देखेंगे तो 20-20 फीट गहरे गड्ढे खोदकर माइनिंग यानी कि खनन किया गया है इन गढ़ों में बरसात का पानी भर जाने के कारण कई मौतें भी हो चुकी है।लेकिन इन मौतों से किसी पर कोई फर्क नही पड़ता। उनको तो केवल पैसा चाहिए और यह गंगा इस खनन के नाम पर इन स्टोन क्रेशर वालों व खनन माफियाओं के साथ ही राजस्व विभाग को इतना धन मुहैया करा देती है कि उनके सात पुस्ते भी बैठकर खाएं तो कम नही रहेगा जो लोग कल तक झोटा बुग्गी चलाया करते थे आज वे लोग गंगा से खनन करके बड़े-बड़े महलों के मालिक बनने के साथ-साथ बड़ी-बड़ी गाड़ियों के मालिक बन गए हैं गले में सोने की मोटी मोटी चेन डालकर घूमते हैं और उनके खर्चे तो आप समझ लीजिए की राजशाही ठाट वाले खर्च हो गए हैं।

यह हाल हरिद्वार जनपद में खनन का है। इस खनन के कारोब से क्षेत्र की पुलिस चौकिया व थानो को भी उपकृत किया जाता है ।हालांकि एस एसपी के सख्त रवैया के बावजूद पुलिस कर्मी अपना खेल कर ही जाते हैं क्योंकि उनके क्षेत्र से गुजरने वाली गाड़ी बिना उनको उपकृत किए हुए पास नहीं हो सकती। हरिद्वार जनपद में होने वाले इस सोने का अंडा नही अंडे देने वाले।इस कारोबार में लगे स्टोन क्रेशर वाले, खनन माफिया , राजस्व विभाग की टीम को एक गेरुआ वस्त्र धारी संत का आशीर्वाद प्राप्त है यह संत राज्य सरकार में अपनी पूरी दखल रखते हैं और हरिद्वार जनपद का तो हर अधिकारी इनके आगे नतमस्तक ही रहता है। साथ ही हरिद्वार जनपद के जितने भी जरायमपेशावर है। वह इनको दंडवत प्रणाम करने में ही अपनी भलाई समझते है।और इन संत महोदय के आशीर्वाद से निर्भीक होकर फल फूल रहे है।


