हरिद्वार: हरिद्वार की जनता को सस्ता सामान उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार में सहकारिता विभाग ने हरिद्वार यूनियन सेंट्रल कंज्यूमर कोऑपरेटिव स्टोर की देवपुरा में स्थापना की थी। उसमें लम्बे समय तक सस्ता कपड़ा,सस्ता साबुन व दैनिक उपयोग की अनेक वस्तुएं बहुत कम मूल्य पर मिला करती थी।कुछ समय बाद उसका नाम बदलकर WCCC Store हो गया और इस उपभोक्ता भंडार की दुर्दशा शुरू हो गई। अब ये स्टोर ज्यादातर बन्द मिलता है। आज यहां जो सचिव है वह उपभोक्ता भंडार की दो राशन की दुकान चला रहा है सुबह को भोपतवाला में तथा शाम को चौहानान ज्वालापुर में।इसी प्रकार एक विक्रेता देवपुरा वाली राशन की दुकान तथा शाम को टिबड़ी वाली राशन दुकान सुबह को खोलता है।इसी तरह चौधरी नाम का विक्रेता इसी भंडार द्वारा संचालित सतीघाट कनखल पर नियुक्त है।इसी तरह एक भाई साहब भेल सेक्टर 1 राशन की दुकान शाम को तथा भेल सेक्टर 2 राशन की दुकान सुबह को खोलते है।सेक्टर 3 में इसी उपभोक्ता भंडार से 5 वर्ष पूर्व रिटायर कर्मचारी योगेश कुमार ने मोटी रकम प्रति माह पर यह राशन की दुकान सचिव से ठेके पर ले रखी है।

इसी तरह 5 वर्ष पूर्व रिटायर कर्मचारी कमल शर्मा ने प्रति माह मोटी रकम पर मोहल्ला डॉट ज्वालापुर वाली राशन दुकान सचिव से ठेके पर ले रखी है।खन्ना नगर स्थित भंडार द्वारा संचालित राशन दुकान विजय कुमार विक्रेता द्वारा संचालित की जा रही है। यह सारा विवरण बताता है कि इतना बड़ा जालसाजी का नेटवर्क बिना जिला सहायक निबंधक हरिद्वार, व जिला पूर्ति अधिकारी हरिद्वार की अनुमति के बिना नहीं चल सकता।हो सकता है इतने बड़े जालसाजी के नेटवर्क के तार देहरादून से तथा सहकारिता सचिव से भी जुड़े हों।देखने वाली बात यह है कि जिस कार्य के लिए इस उपभोक्ता भंडार की स्थापना की गई थी उसे इन लोगों ने किस मुकाम तक पहुंचा दिया है। जो की भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है। इस पर जिलाधिकारी हरिद्वार को जांच करा कर कार्रवाई करनी चाहिए ।
गड़बड़ झाला करते पुलिस ने पकड़ा दुकानदार।
ज्वालापुर पुलिस द्वारा ज्वालापुर थाने के सामने स्थित उपभोक्ता फोरम की दुकान पर गड़बड़ी होते हुए रंगे हाथों पकड़ा जा चुका है जिसकी जांच जिला पूर्ति कार्यालय के अधिकारी व एसडीएम के नेतृत्व में चल रही है क्योंकि पुलिस ने खुद इस दुकान के कर्मचारियों को गड़बड़ झाला करते हुए पकड़ा था और दुकान दार को पड़कर थाने ले आई थी और थाने लाकर सप्लाई दफ्तर के इंस्पेक्टर को बुलाकर जांच शुरू कराई गई है और जांच चल रही है इस कर्मचारी को छुड़ाने के लिए जितने भी राशन माफिया से जुड़े हुए राशन कारोबारी हैं देर रात तक ज्वालापुर थाने पर इस गड़बड़ झाला करने वाले कर्मचारियों को क्लीन चिट दिलाने के लिए जमें रहे लेकिन मामला लिखा पड़ी हो जाने के बाद ही निपट सका ।

अब जांच के बाद पता चलेगा की यह दुकानदार क्या गड़बड़ी कर रहा था हालांकि जांच में होना कुछ नहीं है क्योंकि यह तो एक छोटी मछली है बड़े-बड़े मगरमच्छों को जिलाधिकारी के आदेश पर इस हरिद्वार के अधिकारियों ने लाखों का खेल करते हुए पकड़ा है लेकिन कहा जाता है की खेल करते हुए पकड़े गए तो क्या हुआ खेल कर कर के ही क्लीन चिट पा गए । इसी तरह यह भी खेल करेगा और क्लीन चिट पा जाएगा । क्योंकि इस दुकान का मालिक भी उपभोक्ता की सारी दुकानों का एकमात्र इंचार्ज है और इस इंचार्ज के नेतृत्व में ही सारी दुकाने चलती हैं । ये सचिव कुछ दुकाने खुद चलाता है कुछ दुकान किराए पर दे रखी हैं लेकिन मोटी रकम की कमाई इस कारोबार में इतनी है कि इस कारोबार को यह लोग पकड़े जाने के बाद भी क्लीन चिट पा जाते हैं। क्योकी जब 3700 कट्टे चावल ज्वालापुर खाद्य गोदाम पर पकड़े जाने के बाद एस एम आई व एम आई का कुछ नही हुआ तो इसका क्या होगा।

