हरिद्वार ।
इन साधु संतों पर लगने वाले आरोपो के बावजूद नेता और मंत्री इन साधुओं की चरण वंदना में लगे रहते हैं।
हरिद्वार में विगत एक वर्ष से भी ज्यादा समय से साधु संतकई धड़ों में बटते दिखाई दे रहे हैं उज्जैन से आई एक महिला साध्वी जो अपने को महामंडलेश्वर बताती हैं का सीधा आरोप है ,के निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी उनकी व उनके पूरे परिवार की हत्या करा सकते हैं और वह उनके ऊपर तरह-तरह के अनर्गल आरोप लगवाकर उन्हें जेल भिजवा देना चाहते हैं ।
इस काम के लिए रवींद्र पुरी को महारत हासिल है दूसरी तरफ हरिद्वार के ही महामंडलेश्वर प्रमोदानंद जी का कहना है की जूना अखाड़े के सर्वोच्च चार संत जिनमे हरि गिरि जी प्रमुख रूप से शामिल हैं यह लोग उनकी हत्या करने पर आमादा है अब यह हत्याएं क्यों कराई जाती हैं किन बातों को लेकर कराई जाती हैं यह तो इन साधु संतों को भली-भांति ज्ञात होगा।
लेकिन हरिद्वार की जनता भी काफी कुछ जानती और समझती है इन साधु संतों की आपसी लड़ाई का कारण जर जोरू और जमीन ही मानी जाती है ।क्योंकि आए दिन इन साधु संतों पर महिलाओं के साथ संबंध बनाने अपने गुरुओं की हत्या करा देने के आरोप व संपत्ति पर कब्जा करने के आरोप लगते रहते हैं।

और मामले न्यायालय तक वर्षों तक चलते रहते हैं, इस समय जूना अखाड़े के श्री हरि गिरि जी महाराज व निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी जी महाराज के साथ-साथ दक्षिण कली पीठ के कैलाश आनंद जी महाराज तीनों एक थाली में ही भोजन कर रहे हैं। यह तीनों इस कदर घी खिचड़ी बने हुए हैं कि यह तीनों सबसे ज्यादा एक दूसरे के ख़ास बने हुए हैं। लेकिन इस खास बनने के पीछे भी इन तीनों के आपसी स्वार्थ एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं ।
उधर निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी जी व जूना अखाड़े के हरि गिरि जी महाराज अपने आप को साधु संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष व महामंत्री घोषित करते रहते हैं। जबकि अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष और महामंत्री का पद इस समय रिक्त चल रहा है।क्योंकि अभी तक किसी भी संत को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महामंत्री पद से नवाजा नहीं गया है, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महामंत्री का चुनाव केवल कुंभ मेले के लिए किया जाता है ,और उसके बाद स्वम् ही यह दोनों पद समाप्त हो जाते हैं ।
कुंभ मेले के लिए भी इन दो लोगों का चुनाव केवल इसलिए किया जाता है की कुंभ में जिला प्रशासन के साथ तालमेलकर साधु संतों को कुंभ मेले में पडने वाले कार्यों को यह अध्यक्ष और महामंत्री सही तरीके से संपन्न कराए। लेकिन विगत 20 वर्षों से तो हरी गिरी जी महाराज अखाड़ा परिषद के महामंत्री बने हुए हैं और नरेंद्र गिरी जी की मृत्यु के बाद रवींद्र पुरी जी खुद ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बन गए हैं ।जिसको लेकर साधु संतों में आपस मे कलह का वातावरण पैदा हो चुका है।
और इस कलह का वातावरण प्रशासनिक अधिकारियों के लिए सर दर्द बना रहता है। लेकिन इतनी दौलत होने के बावजूद भी माया मोह से आम जनमानस को त्याग का पाठ पढ़ाने वाले यह लोभी संत केवल माया और छाया में ही व्यस्त दिखाई देते हैं। इनको ना तो अपने मान सम्मान का कोई ख्याल है ना ही जिस कार्य के लिए यह संत बने हैं सनातन धर्म के प्रचार प्रसार का इनको कोई ध्यान है इन्हें तो केवल और केवल माया और छाया से मतलब है ।

और इनके आरोप इन लोगों के ऊपर लगते रहते हैं ।साथ ही अब तो खुले आम लोगों ने इनके ऊपर अपनी हत्या तक करा देने के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं । ये साधु संत ही जानते होंगे और वह साध्वियां जानती होंगी जो अपनी हत्या कराने या महामंडलेश्वर जानते होंगे जो अपनी हत्या कराने के आरोप इन बड़े मठाधीशों के ऊपर लगाते रहते हैं।लेकिन कुलमिलाकर इन गेरूआ वस्त्र धारियों की करतूते आम जनमानस को इनके बारे में सोचने पर विवष कर रही है।


