देहरादून। नगर निगम के सारे वित्तीय अधिकार हैं एमएनए के पास मेयर को किसी प्रकार का नहीं है कोई अधिकार ।यही हाल है पार्षदों का।पार्षद भी झुनझुना लिए रहे है डोल।
उत्तराखंड में 11 नगर निगम है इन 11 नगर निगमो के मेयरों ने चुनाव जीतकर मेयर बनने के लिए कई करोड़ रुपए चुनाव में खर्च किए थे। तब जाकर इन्हें मेयर की कुर्सी नसीब हुई थी।
यही हाल नगर निगम के पार्षदों का भी है ।पार्षदों ने भी पार्षद बनने के लिए लाखों रुपए चुनाव में सुहाह किए हैं। बावजूद इसके जहां नगर निगम के मेयरों को एक गाड़ी पर मेयर लिखकर चलने की अनुमति है।

वहीं पार्षद तो बिल्कुल ही पैदल है। कारण नगर निगम के मेयरों को किसी प्रकार की न तो नियुक्ति का अधिकार है और ना ही वित्तीय अधिकार है। यह कहे कि नगर निगम के समस्त अधिकार नगर निगमों के एमएनए के पास है ।तो अतिशयोक्ति नही होगी क्योकी एमएनए को ही वित्तीय अधिकारो के अलावा सभी अधिकार एमएनए के पास हैं।
एक तरीके से नगर निगम के असली मालिक एमएनए हैं। राज्य सरकार ने मेयरों को किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं दे रखा है ।इसलिए मेयर केवल उदघाटन करने और सभाओ में जाकर सभाओ की शोभा बढ़ाने तक ही सीमित है।

कई मेयरों से जब इस विषय पर बातचीत की गई की आप करोड़ों रुपए लगाकर मेयर बने हो तो इसका क्या फायदा है ।तो उनका यही यही कहना था की राज्य सरकार जो चाहती है वही होता है इसलिए जैसी राज्य सरकार की मर्जी है उसी तरीके से रहना होगा ।
देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल के अनुसार वे जनता की सेवा करने के लिए मेयर बने है। और वित्तीय अधिकार तो पहले से ही एमएन ए के पास ही होते है।उसकी मर्जी है ।वो मेयर के कहने से कार्य करे , उचित न समझे तो न करे। हम तो यही कहेंगें की मेयरों व पार्षदो के तमाम मंसूबों पर राज्य सरकार ने पानी फेर दिया है ।

क्योकी नगर निगम के मालिक हैं ।तो नगर निगम के एमएनए ही है। कुछ विपक्षी पार्षद तो साफ साफ कहते है की जब सारे अधिकार एमएनए को ही देने थे तो चुनावों की नौटंकी क्यों।

