31 Jul 2026, Fri

शिव भक्त कांवरियों के आगमन व प्रस्थान में गुरु पूर्णिमा के दिन से आ गई है तेजी

हरिद्वार । हरिद्वार में 11 अगस्त तक चलने वाला कांवर मेला जिसे हम विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा का नाम दे सकते हैं, वह यूं तो पिछले 15 दिनों से चल रही है लेकिन गुरु पूर्णिमा के दिन से इन शिवभक्त कांवरियों के आगमन व हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर अपने-अपने नगरों और कस्बों की तरफ प्रस्थान करने में तेजी आ गई है।

इस समय तीर्थ नगरी हरिद्वार में काफी कांवरिए पहुंच चुके है, एक अनुमान के अनुसार इस बार भी कांवरियों की संख्या कि यदि गिनती की जाए तो यह गिनती कर पाना मुश्किल है।

लेकिन फिर भी करीब तीन से चार करोड़ कावड़िया हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर अपने-अपने नगरों और कस्बों की ओर प्रस्थान करेंगे ये पैदल यात्रा करते हैं इसमें बच्चे बूढ़े नौजवान महिलाएं और युवा बालिकाएं भी होती हैं।

इन श्रद्धालुओं के पैरों में पैदल यात्रा करते समय छाले भी पड़ जाते हैं, जिनके लिए मोबाइल मेडिकल गाड़ियां चलती है, जो अपने साथ दवाई और पैरों में या कहीं भी चोट लग जाए तो उसकी मरहम पट्टी करने का भी सारा सामान रख कर चलते है,इन गाड़ियों में डॉक्टर भी होते हैं वे इन शिव भक्तों का निशुल्क उपचार करते हैं।

साथ ही रात्रि में जो श्रद्धालु चलते चलते थक जाते हैं व विश्राम करना चाहते हैं, उनके लिए सामाजिक संस्थाएं व बड़े-बड़े उद्योगपति बाकायदा टेंट लगवाते हैं भोजन का प्रबन्ध करते हैं रास्ते में यहां से दिल्ली तक और उससे आगे तक भी और उनके खाने-पीने का और यहां तक के उनके पैर दबाने तक का प्रबंध करते हैं।

काफी सारे उद्योगपतियों को तो मैंने भी शामली रोड पर रात्रि में कांवरियों की सेवा करते हुए देखा है ,जिसमें कांवरियों के चरण दबाना तक शामिल होता है।

लेकिन कुछ शिव भक्ति कांवरिये जो अपने आप को कांवरिया कहते हैं वह मेरी निगाह में कांवरिये नहीं होते हैं , जो उपद्रव करते हैं झगड़ा करते हैं दंगा फसाद करते हैं या नशा करने आते ये गुंडे होते है।

बाबा भोलेनाथ ऐसे लोगों से हमेशा रुष्ट रहते हैं, और इन लोगों के साथ कभी ना कभी होनी अनहोनी होती रहती है।

हरिद्वार प्रशासन शांतिपूर्वक पवित्र गंगा जल लेने आने वालों का स्वागत करता है ,और दंगा फसाद करने वालों से सख्ती से निपटता है।

कभी कभी कांवर किसी गाड़ी या मोटरसाइकिल से स्पर्श भी कर जाती है, तब भी आपकी कांवर खंडित नहीं होती है, खंडित तो तब होती है जब आप वहां लड़ाई झगड़ा करते हैं और नशा करते हैं, तभी आपकी कांवर खंडित होती है, बाबा भोलेनाथ खंडित कांवर स्वीकार नही करते हैं।

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