29 Mar 2026, Sun

बीजेपी को सत्ता तक पहुचाने वाले गुमनामी की जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं ।

हरिद्वार। भारतीय जनता पार्टी को सत्ता दिलाने में जिन नेताओं व महिला नेत्रियों का सबसे बड़ा योगदान है वह सभी गुमनामी की जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। एक जमाना था ।जब साध्वी ऋतंभरा ,उमा भारती, सुषमा स्वराज ,प्रवीण तोगड़िया, गोविंदाचार्य व लालकृष्ण आडवाणी की सभा में बेतहाशा भीड़ जुटा करती थी। और कांग्रेस की सरकार ने इन सभी नेताओं को भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध करा रखी थी।अब हालात यह हैं कि चाहे लालकृष्ण आडवाणी हो या साध्वी रितंभराह हो चाहे उमा भारती हो या सुषमा स्वराज जी तो स्वर्ग सिधार गई है और चाहे चाहे प्रवीण तोगड़िया हो और चाहे गोविंदाचार्य हो इन सभी लोगों के बारे में ढूंढने से भी पता नहीं चलता की यह लोग कहां हैं ।इन लोगों ने अपना खून पसीना बहाकर बीजेपी को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया है। इन सब में अब साध्वी ऋतंभरा ने तो अपने आप को केवल धार्मिक प्रवचनो व सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में ही लगा रखा है।

वह अपने गुरु हरिद्वार स्थित स्वामी परमानंद जी के संपर्क में रहती हैं। बाकी वे शांति प्रिय तरीके से अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं। ऋतंभरा की जनसभाएं जब हुआ करती थी तो लोग 10-10 घंटे इन महिला साध्वी के भाषण सुनने के लिए प्रतीक्षा किया करते थे और यह फायर ब्रांड साध्वी जब बोलती थी तो लोग तालियां ही बजाते रहते थे सत्ता के शीर्ष तक बीजेपी को पहुंचने में जहां साध्वी ऋतंभरा ,प्रवीण तोगड़िया , गोविंदाचार्य की प्रमुख भूमिका है वही उमा भारती सुषमा स्वराज वह लालकृष्ण आडवाणी की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता लेकिन वर्तमान में सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेताओं ने इन सभी नेताओं साध्वियों को भुला दिया है। लेकिन इन सब में भी जो भूमिका भारतीय जनता पार्टी को सत्ता दिलाने में साध्वी ऋतंभरा व प्रवीण तोगड़िया की है ।

उसको बीजेपी व संघ के इतिहास में हमेशा जाना जाता रहेगा। इसको नकारा नहीं जा सकता की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई एक ऐसे सर्वमान्य नेता थे ।जिनका इंद्रा गांधी के साथ ही देश की जनता बेहद सम्मान करती थी।अटल जी असूलों के पक्के थे। उन्होंने उसूलों के लिए सरकार को भी छोड़ दिया था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई भी साध्वी ऋतंभरा, प्रवीण तोगड़िया, उमा भारती, लालकृष्ण अडवाणी, सुषमा स्वराज का बेहद सम्मान किया करते थे ।लेकिन वक्त वक्त की बात है कभी का दिन बडा तो कभी की रात आज हालात यह हैं यह सभी लोग गुमनामी की जिंदगी जीने पर मजबूर है।

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