नरेश गुप्ता
हरिद्वार । हरिद्वार नगर निगम के 58 करोड रुपए के घोटाले के मुख्य आरोपी I A S वरुण चौधरी को इस जांच से बचाने के लिए एक आईएएस ने काफी प्रयास किया और अभी भी यह I A S कोई ना कोई दांव खेल रहा है ।की किसी तरह वरुण चौधरी का बचाव हो जाए लेकिन वरुण चौधरी का बचाव होना मुश्किल है क्योंकि कागजात बोल रहे हैं कि इस घोटाले का मुख्य आरोपी वरुण चौधरी ही है ।वरुण चौधरी के इस घोटाले की पूरी जानकारी पीसीएस से I A S बने इस अधिकारी को थी| यह अधिकारियों के समक्ष इस तरह का भाव दर्शाता है कि यह ही उत्तराखंड राज्य को चला रहा है ।पीसीएस रहते इस अधिकारी ने काफी गुल खिलाए थे और आईएएस बनने के बाद तो इसके पर लग गए हैं। इतना माल कमा लिया है कि अगर इसकी संपत्ति की जांच हो जाए तो इतना माल निकलेगा कि अधिकारी दांतों तले उंगली दबा लेंगे ।इस अधिकारी का हाजमा भी काफी दुरुस्त है ।इस अधिकारी ने वरुण चौधरी को बचाने के लिए वरुण चौधरी प्रकरण की जांच खुद लेने के लिए काफी प्रयास किए थे लेकिन मुख्यमंत्री ने रणवीर चौहान I A S को यह जांच देकर ऐसा कार्य किया है कि अब दूध का दूध और पानी का पानी होता दिखाई दे रहा है ।लेकिन यह पीसीएस से I A S बना अधिकारी अपनी हरकतों से अभी भी बाज नही आ रहा है ।लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस प्रकरण की गहराई का ज्ञान हो चुका है। इस पीसीएस से I A S बने अधिकारी के साथ तीन-चार इसके चमचे टाइप आईएएस भी वरुण चौधरी को बचाने के लिए लॉबिंग कर रहे थे लेकिन इनको भी ऊपर से फटकार मिलने के बाद इनको शांति पड़ गई है ।क्योंकि उत्तराखंड राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की लॉबी इस भ्रष्ट वरुण चौधरी को बचाने में कोई दिलचस्पी नही दिखा रही है। जांच अधिकारी रणवीर चौहान नगर निगम के 58 करोड़ के घोटाले की जांच कर रहे है । जांच पूरी होने पर इसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी जाएगी
मुख्यमंत्री के प्रयासों को पलीता लगा रहे कुछ अधिकारी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस राज्य को उत्कृष्ट राज्य बनाने के लिए जहां प्रयास रत है वही इस राज्य में मौजूद कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री के मंसूबो पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री ने अब इस तरीके के अधिकारियों से भी निमटने के लिए कमर कस ली है। इस वरुण चौधरी की जांच रणवीर चौहान को देकर मुख्यमंत्री ने राज्य में एक नजीर पेश की है । की अब इस राज्य में भ्रष्टाचार करने वालों की कोई जगह नहीं होगी ।इस प्रकरण में वरुण चौधरी के साथ ही एसडीम अजय सिंह जिन्होंने 143 करने से लेकर और काफी कार्यों में इतनी तेजी दिखाई के इनकी कार्यशैली पर भी उंगलियां उठ रही है। इस वरुण चौधरी ने एक खेल हरिद्वार के जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह व उस समय के नगर निगम के प्रशासक रहे कमरेंद्र सिंह के साथ भी कर दिया है ।

जांच अधिकारी रणवीर चौहान IAS
उनसे इस जमीन को खरीदने की अनुमति वाली फाइल पर धोखे से साइन करा लिए हैं ।जबकि अमरेंद्र सिंह ने साइन करने से पहले इससे पूछा था ।क्या यह फाइल बिल्कुल ठीक है तो कमरेंद्र सिंह को इस वरुण चौधरी ने कहा की मैंने सारी फाइल चेक कर ली है आप साइन कर दीजिए सीधे-साधे कमरेंद्र सिंह ने इस फाइल को बिना पढ़े इस पर साइन कर दिए और कमरेंद्र सिंह भी जांच के दायरे में आ गए हैं ।इससे पहले भी वरुण चौधरी ने एक बार अपनी फाइले चेक करने को लेकर जिलाधिकारी कमरेंद्र सिंह के सामने शोर मचाया था कि मेरी फाइलें अब ओ सी, पीसीएस अधिकारी चेक किया करेंगे इस पर जिलाधिकारी कमरेंद्र सिंह शांत हो गए थे। और इसने अपनी कोई फाइल कभी भी किसी अधिकारी को चेक नहीं कराई खुद ही फाइलों पर प्रपोजल बनाता था खुद ही सारा काम कर संबंधित अधिकारियों से चिड़िया बैठवा लिया करता था लेकिन कहावत है बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी 100 दिन चोर के तो एक दिन शाह का भी होता है ।इसी खेल में वरुण चौधरी पूरी तरीके से फंस गए हैं ।नगर निगम हरिद्वार की मेयर ने तो साफ शब्दों में कहा था की वे वरुण चौधरी के कारनामो को लेकर हाई कोर्ट भी जा सकती है। क्योंकि वरुण ने नगर निगम को 58 करोड़ का चूना लगाकर नगर निगम को एक बहुत भारी चपत लगाने के साथ ही राज्य सरकार के साथ भी चारसौ बी सी की है।

मेयर, किरण जैसल
वरुण चौधरी का आका।
इस वरुण चौधरी का आका जो देहरादून में बैठता है वह अपने आप को चीफ सेक्रेटरी से कम नहीं समझता है। अधिकारी भी सोचते हैं की चीफ सेक्रेटरी आनंद वर्धन है या यह पीसीएस से I A S बना अधिकारी चीफ सेक्रेटरी है ।क्योंकि इसकी हरकतें इसके हाव-भाव बिल्कुल चीफ सेक्रेटरी की तरह दिखाई पड़ते हैं। जबकी असली चीफ सीक्रेट आनन्द वर्धन भी इतनी हनक नही दिखाते है।जितनी ये I A S साहब दिखाते है।मुख्यमंत्री को चाहिए की इस तरह के अधिकारियों को भी इनकी हैसियत बताए।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी।अब भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा

