हरिद्वार ।
नरेश गुप्ता
आज से सावन शुरू हो गया है पूरे एक माह भगवान भोलेनाथ को समर्पितं यह मास भगवान भोलेनाथ की आराधना करने वाले शिव भक्त इस सावन की प्रतीक्षा करते है। बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न कर उनसे मनोकामनाएं मांगने का पर्व सावन माना जाता है ।सावन में ही बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए । शिव भक्त कांवरिये हरिद्वार के अलावा देश भर के अन्य उन स्थानों से गंगाजल लेकर अपने-अपने नगरों और क़स्बों में बाबा भोलेनाथ के शिव मंदिरों में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
विश्व का सबसे बड़ा मेला है, ये काँवड़ यात्रा।

तीर्थ नगरी हरिद्वार में लगने वाला संसार का सबसे बड़ा मेला कहा जा सकता है ।यह काँवड़ मेला दिन-रात चलता रहता है। शिव भक्त कांवरिये हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर ,जिसमें छोटे-छोटे बच्चे बूढ़े नौजवान, महिलाएं शामिल होते हैं और सभी भोले,भोली अपनी अपनी मनौतिया लेकर गंगाजल लेने आते हैं ।इस मेले में कई तरह के दृश्य देखने को मिलते हैं ।जिसमें कोई शिव भक्त अपने माता-पिता को कांवड में बैठाकर जल लेने आता है। तो कोई अपनी नौकरी के लिए बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना करता है ।कोई अपने विवाह के लिए तो कोई अपने घर में संतान होने के लिए यहां तक की अब तो लोग अपनी प्रेमिकाओं को अच्छी नौकरी मिल जाने के लिए तक कावड़ लेने आते हैं, अधिकांश कांवरिया कई कई बार कांवड़ लेने आते हैं कुछ कांवरिया तो ऐसे हैं जो पिछले 15 वर्षों से लगातार कांवड़ लेने आते हैं ।और अपने नगरों और शहरों के शिवालयो में गंगाजल हरिद्वार से ले जाकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
झगड़ा व नशा करने वाले कांवड़ियों से होते है, बाबा भोले नाथ रुष्ट।

कुछ कावड़िये अकारण ही छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाते हैं और लड़ाई झगड़ा शुरू कर देते हैं जो की किसी भी कांवरिये के लिए उचित नही है। शास्त्रों में भी बताया गया है कि शिव भक्त कांवरियों को बहुत ही शांति पूर्वक व एकाग्र चिंतन के साथ शिव भक्ति में लीन रहते हुए । पवित्र गंगाजल हरिद्वार से लेकर उन्हें जहां भी जल चढ़ाना है वहां तक केवल बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए चले जाना चाहिए लेकिन जरा जरा सी बातों पर मारपीट करना गाली गलोज करना लोगों की गाड़ियां तोड़ देना गाड़ियों में आग लगा देना यह शिव भक्तों को किसी भी तरीके से शोभा नहीं देता है ।साथ ही जिस रास्ते पर शिव भक्त चलते हैं उस रास्ते पर चलने वाले वाहनों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वह शिव भक्तों से कम से कम एक फिट की दूरी बनाकर रखें ,क्योंकि शिव भक्त कांवरिया अपनी कांवड को बहुत ही पवित्र मानते हैं ।और वह नहीं चाहते कि उनकी काँवड़ किसी भी व्यक्ति से टच हो या उनकी काँवड़ को किसी भी तरीके की कोई ठेस पहुंचे । इस चीज को लेकर कांवरिया क्रोधित हो जाते हैं और उत्तेजना में आकर कांवरियों की जो टोली होती है वह मारपीट और आगजनी पर उतारू हो जाती है।
मेले के लिए राज्य सरकार व हरिद्वार जिला प्रशासन ने की है, चाक चौबंद व्यवस्था।

हरिद्वार से शुरू होने वाले इस मेले की पूरी तैयारी की जाती है। इस बार तो मेले के लिए उत्तराखंड राज्य सरकार ने अच्छा खासा तो नहीं कहा जा सकता ,लेकिन फिर भी 10 करोड़ का बजट देने की बात की है जिसमें से करीब 5 करोड रुपए आ चुका है और 5 करोड़ और मिल जाएगा।हर बार 4 महीने पहले से मेले की तैयारियों के नाम पर बैठके शुरू हो जाती है और रही बात जिला प्रशासन के अधिकारियों की चाहे उसमें P W D वाले हो या जल निगम वाले हो बिजली वाले हो या नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी किसी के कान पर जूं नहीं रेंगती है।जिलाधिकारी कितना भी इन विभागों को टाइट करें लेकिन इनके ऊपर कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि ये जानते है की मेला तो पुलिस ने कराना है। कोई कुछ भी बोलता रहे यह मेला केवल और केवल पुलिस के ऊपर जाकर निर्धारित हो जाता है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को सेक्टर मजिस्ट्रेट की जुम्मेदारी सौंपी जाती है।
लेकिन शिव भक्तों की भीड़ के सैलाब के आगे सारी व्यवस्थायें धरी रह जाती है। आला अधिकारी जिसमें जिलाधिकारी व एसएसपी तक डंडा लेकर मोटरसाइकिल पर दौड़ते हुए देखे जा सकते हैं। मेले के अंतिम चार दिनों में सारी व्यवस्थाएं जितनी भी व्यवस्थाएं जिला प्रशासन व पुलिस करती है वह सब धड़ाम हो जाती हैं। क्योंकि कांवरियों का रेला व डांक काँवड़ इस कदर आता है। की हर अधिकारी या कर्मचारी बाबा भोलेनाथ से यही प्रार्थना करते है की, किसी तरीके से यह कांवरिये हरिद्वार से प्रस्थान करें , व जल लेकर अपने-अपने नगरों और कस्बो की तरफ सकुशल पहुंचे और वहां जाकर जल चढ़ाएं ।हालत यह हो जाते हैं की पुलिस को यही नहीं पता रहता है । की हमने कब खाना खाया था कब नहाए थे कब क्या किया था सब कुछ पुलिस के ऊपर होता है या जिला अधिकारी भागे फिरते हैं ।

जिलाधिकारी से नीचे के जो अधिकारी हैं उन पर जिला अधिकारी कितना ही शोर मचाते रहे कुछ करते रहे उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता ।काँवड़ मेला शुरू होने से पूर्व सड़के ठीक करने व नहर पटरी ठीक करने की बात पिछले 4 महीने से चल रही है लेकिन अब जाकर जब कांवड़ मेला शुरू हो गया है तब सड़कों पर पेबंद रूपी टुककी लगनी शुरू हुई है ।जो एक बरसात होते ही ,बह जाएंगी और पैसा ठिकाने लग जायेगा। यह कोई पहली बार नहीं है ।क्योंकि हर साल नहर पटरी पर से घास साफ करने और सड़के ठीक करने की बातें 4 महीने पहले करनी शुरू हो जाती है लेकिन होता कुछ नहीं है। सारे अधिकारी नहर पटरी और सड़कों का दौरा करते हैं फोटो खिंचती हैं वीडियो बनती हैं और बस हो गया काम, लेकिन शिव भक्त कांवरियो को इन सब चीजों से कोई लेना देना नही होता उनको तो भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करना है गंगाजल लेना है और अपने-अपने गंतव्य स्थान की ओर रवाना होना है ।
शान्ति पूर्वक शिव आराधना में लीन शिव भक्तों से बाबा भोलेनाथ होते है प्रसन्न।

इन शिव भक्त कांवरियों से हम निवेदन करेंगे कि यहां से जल लेकर जाते समय किसी प्रकार का नशा व
उपद्रव ना करें क्योंकि आप जिस मनौती या मनोकामना को लेकर इतनी दूर से हरिद्वार गंगा जल लेने आए हैं और अपने नगरों के शिवालियों की ओर जाकर वहां शिवालयो में जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे , लेकिन नशा करने वाले और उपद्रव करने वाले कांवड़ियों को इस यात्रा से कोई फायदा होने वाला नहीं है। कोई उनकी मनोकामना पूरी होने वाली नहीं है ।क्योंकि इस तरीके के लोगों से बाबा भोलेनाथ बहुत ही जल्दी रुष्ट भी हो जाते हैं और बाबा की आराधना शान्ति पूर्वक करने वालों से बाबा भोलेनाथ बहुत ही जल्दी प्रसन्न भी हो जाते हैं ।तो ऐसा कोई कार्य न करें जिससे बाबा भोलेनाथ आपसे रुष्ट हो ।आप बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से हरिद्वार से गंगाजल लेकर जाएं और बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें जिससे आपकी मनोकामनाएं भी पूरी हो सके।

