देहरादून, उत्तराखंड के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज शंख को हड्डी का बना होना बताते हैं, हालांकि यह खुद तो कभी भी शंख नही बजाते हैं , लेकिन बद्रीनाथ मंदिर में शंख केवल इसलिए नहीं बजाया जाता क्योंकि शंख को हड्डी का बना हुआ माना जाता है ,ये कहना है सतपाल महाराज जी का।
मंत्री जी आध्यात्मिक गुरू हैं इन गुरु जी को इतना भी ज्ञान नही है की शंख समुन्द्र में पाया जाता है, खासकर रामेश्वरम व जगन्नाथ पुरी में बहुत बडी तादाद में समुन्द्र से निकलते हैं वहां के शंख काफी प्रसिद्ध है ।

उत्तराखंड के ज्यादातर महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री सतपाल महाराज जी हैं, महाराज जी पहले कांग्रेस के बड़े कद्दावर नेता हुआ करते थे, और कांग्रेस शासन में भी मंत्री थे लेकिन बहुत दिनों से चाहे वह कांग्रेस में रहे हो या बीजेपी में हो मुख्यमंत्री बनने के लिए लालायत है, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पा रहे हैं ।नाम मुख्यमंत्री के लिए चल भी जाता है लेकिन अंतिम छड़ों में बाजी कोइ दूसरा मार ले जाता है।
सनातन धर्म के अंदर सत्यनारायण भगवान की जब पूजा घरों में होती है या कहीं भी होती है तो शंख बजाया जाता है ,और गंगा मां की आरती के समय भी हर की पौड़ी पर शंख की ध्वनि आपको आराम से सुनने को मिल जाएगी। लेकिन आज तक किसी ने यह नहीं सुना कि यह शंख हड्डी के बने होते है।
शंख तो समुद्र से निकला हुआ एक ऐसा अनमोल उपकरण है जो सनातन धर्म में सभी शुभ कार्यों में बजाया जाता है, सतपाल महाराज जी को शायद इसका ज्ञान नहीं होगा ।क्योंकि महाराज जी ज्यादातर अपने जन्मदिन पर सदभावना सम्मेलन करने केअलावा प्रवचन करते हैं , कभी कभी कथा भी करते हो तो मुझे पता नही है यदि कथा करते होंगे तब तो शंख बजाना पड़ता होगा, वो भी हड्डी वाला बकौल महाराज जी के।

