देहरादून।
जिन्होंने लुटाई अस्मत, जिन्होंने सीने पर खाई गोलियां, उनका कोई नाम लेवा नही।
उत्तराखंड के लिए कई वर्ष तक आंदोलन हुए इन आंदोलनों में महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया । महिलाओं की बदौलत ही उत्तराखंड राज्य की प्राप्ति हुई है। जिन बहनों ने अपनी अस्मत लुटवाई और जिन नौजवानों ने सीने पर खाई गोलियां और राज्य की मांग करते करते पुलिस की गोलियां खाई और शहीद हो गए। लेकिन उनके परिवार को कोई पूछने वाला तक नही है।

मौज आ रही है ब्यूरोक्रेसी व खददरधारियों की ।
जब से उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ है।राज्य का विकास तो जो हुआ है वो राज्य की जनता के सामने है।लेकिन राज्य के खददरधारियों का व राज्य में सेवाएं दे रहे अधिकारियों का ऐसा विकास हुआ है।की सात पुस्ते बैठ कर खायेंगे।जिन खददरधारियों को खाने के लिए रोटी पहनने के लिए कपड़ो तक का जुगाड़ करना पड़ता था ,आज वे चमचमाते कल्फ़ दार कपड़े और बड़े और शानदार होटलों में भोजन बड़ी बड़ी गाडियों में भृमण करना पीने के नाम पर जो देशी व कच्ची मिल गई तो अपने को धन्य समझा करते थे।आज ब्लेक लेबिल से कम की बात नही करते है।

ब्यूरोक्रेटस का तांडव,80 प्रतिशत लुटेरे, 60 प्रतिशत महा लुटेरे राज्य को लूटने पर आमादा है।यही हाल निचले स्तर के कर्मचारियों का है।
राज्य में चाहे कॉंग्रेस का राज रहा हो या बी जे पी का मौज अधिकारियों की ही रही है।जिसकी जो इच्छा हुई वो किया गंगा किनारे होटल ,रिजॉर्ट बनवाना जंगलों के बीच मौज मस्ती के लिए रिजॉर्ट की अनुमति देना।पहाड़ो को तोड़ कर विकास के नाम पर विनाश की अनुमति देकर अपनी और खददरधारियों की जेबें भरना यही कार्य ,इस राज्य में निर्माण के समय से आज तक चल रहा है।प्रकृति से की जा रही छेड़छाड़ का परिणाम ही है।

उत्तराखंड में आपदाएं आना आपदा में कोई नेता या ब्यूरोक्रेट्स जमीदोज नही होता है।काल के गाल में समाते है गरीब ,जिनके नाम पर मुआवजे के नाम पर भारी भरकम राशी केंद्र सरकार से मांगी जाती है।उस राशी को ठिकाने लगाने के बाउचर पहले से तैयार रहते है।ऐसा लगता है।मानो कुछ अधिकारियों को तो आपदा की प्रतीक्षा रहती हो।की कब आपदा आये और कब माल कमाए।

उत्तराखंड के खद्दरधारी भी कर रहे कमाल ,कुछ की पत्नियां करती है डील ,तो कुछ के पति करते है लेन देन का काम और कुछ सीधे डायरेक्ट लेने से भी नही करते है पेरेज।

उत्तराखंड में बिना गांधी जी के दर्शन कराए कोई कार्य नही होता।जो ईमानदार अधिकारी है।उनको कोई सीट पर रहने नही देता क्योकी महा ईमानदारों की लम्बी फ़ौज के आगे कोई टिक ही नही पता,खददरधारियों ने तो लक्ष्मी पूजन के लिए अपने पति पत्नी तक को चार्ज दे रखा है।
उत्तराखंड में कार्यरत अधिकांश आर एस एस के सेवको को भी अब गरीबों के घर का खाना व रहना पसंद नही,पांच सितारा होटलों से कम बात नही करते है।

किसी जमाने मे मोटा खाना, मोटा पहनना व जहां जगह मिल गई वही रात बिता देना वाले संघ के पदाधिकारियों के रहन सहन में बेतहाशा परिवर्तन आया है।अब ब्रान्डेड कपड़े ब्रान्डेड घड़ियां बड़ी बड़ी गाड़ियां पांच सितारा होटलों में भोजन ये पसन्द बन गई हैं संघ के अधिकांश पदाधिकारियों की, सरकार से बड़े बड़े काम कराने टिकट दिलवाने दर्जा धारी बनवाने के अलावा ट्रांसवर पोस्टिंग सभी कार्य आसानी से कराने में सक्षम होते है। इन कार्यो के बदले कुछ तो प्राप्ति होती होगी , होती है लाखो में नही करोड़ो में होती है ,संघ के ये आधुनिक युग के कर्णधार, संघ से जुड़े पुराने कार्यकर्ता भी इन आधुनिक युग के कर्णधारों की करतूतों को जानते है ,लेकिन कुछ भी कह पाने की स्थिति में नही है।

पुष्कर सिंह धामी, भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाना है।
मुख्यमंत्री का भृसटाचार मुक्त राज्य का कब होगा स्वपन पूरा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद ईमानदार ,पूजा पाठी, गरीबों के मसीहा जमीन से जुड़े हुए नेता है।धामी जी कई बार इस राज्य को आदर्श राज्य बनाने की घोषणा कर चुके है।लेकिन उनकी घोषणाओ को कोई मंत्री तवज्जो नही देता है। अधिकारियों के तो कहने ही क्या ,वे माल लेकर भी आपका का काम कर दे तो गनीमत है।लेकिन मुख्यमंत्री ने भी प्रण किया है।की भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनकर ही दम लूंगा

