राजनीति समाज सेवा नहीं , अब व्यापार बन गई है ,जब ग्राम प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक करोड़ अरबो रुपए खर्च करके कुर्सी तक पहुंचेंगे तो यह सेवा करेंगे या अपनी लागत ब्याज सहित बटोरेंगे ।दो दशक पूर्व तक एसा नही था, लोग मामूली पैसो में चुनाव लड़ लिया करते थे,
देहरादून । एक जमाना था जब राजनीति को समाज सेवा का नाम दिया जाता था,...










