हमारे देश को विभिन्न संस्कृतियों की माला यूं ही नहीं कहा जाता भारत में ही रहने वाले आदिवासी लोग, देवी देवताओं की पूजा नहीं करते हैं वे केवल वृक्षों की पूजा करते हैं ,और सूखे वृक्षों को अगर काट कर घर लाते हैं जिससे कि चूल्हा जलाया जा सके उससे पूर्व भी वृक्षों को हाथ जोड़कर प्रणाम किया जाता है ।
ऐसी परम्परा आदिवासी क्षेत्रों में देखी जा सकती है ,यह कहना है भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ।
जबकि हमारे देश के कई राज्यों में तो वृक्षों को काट कर लोग करोड़पति से लेकर अरबपति तक बन गए हैं ,और ऐसे लोग जो पेड़ों के दुश्मन है उनका कोई कुछ बिगाड़ भी नहीं पता है, उनकी पूरी सेटिंग नीचे से लेकर ऊपर तक होती है जबकि जब वृक्ष खड़े होते हैं तो उसी इंसान को छाया प्रदान भी करते हैं जो उनके ऊपर बेदर्दी से आरा चलाता है।

