हरिद्वार।
हरिद्वार में कार्यरत रहे खनन अधिकारी महोदय अत्यधिक घमंड में रहते थे, पैसे का नशा उनके उपर इतना जबरदस्त था, की वह आईएएस आईपीएस को भी अपने सामने कुछ नहीं समझते थे।
एक बार मैंने खुद उनको ईद के मौके पर फोन करके कहा था, की मान्यवर आजकल रमजान चल रहे हैं। उन्होंने कहा जी चल रहे हैं , क्या आप कभी रोजा रखते हैं। बोले हां रखता हूं। कुरान शरीफ पढी है।
बोले हां पढी है, तो मैंने कहा मेरे हिसाब से तो कुरान शरीफ में लिखा है, गलत धन लेना तो बहुत दूर की बात है, अगर आप किसी का पैसा भी समय पर अदा न करें, या झूठ बोले तो अल्लाह ताला आपकी नवाज भी कबूल नहीं करता है। तो ऐसे में यह रोजा रखने का और बहुत सारी चीजों का कोई फायदा है ।
इस पर साहब मौन साध गए थे, और उनका कोई जवाब मुझे नहीं मिला था। लेकिन ऊपर वाले की लाठी में बहुत दम होता है, वह कभी ना कभी ऐसी पड़ती है ,ऐसी पड़ती है, कि उससे बचाने वाला कोई मिलता नहीं है ।
खनन अधिकारी महोदय इससे पहले भी कई बार इस तरीके की हरकतें कर चुके थे, जैसी उन्होंने दो दिन पूर्व एक यूकेडी के नेता और एक पत्रकार के साथ की थी, पत्रकारों को तो खैर वह समझते भी क्या।
क्योंकि ज्यादातर पत्रकार तो उनके अपने ही गुर्गे हुआ करते थे। जानकारी तो यह भी है, की ऐसे अनेक पत्रकारों की एक सूची भी उन्होंने बना रखी थी जो उनसे प्रतिमा उपकृत हुआ करते थे। तो वह किसी पत्रकार को क्या समझते लेकिन वे भूल गये होंगे की सभी कलमकार एक जैसे नही होते।
रही बात यूकेडी की तो यूकेडी की कोई सरकार तो उत्तराखंड में है ,नहीं इसलिए वह यूकेडी के किसी नेता से क्यों डरते। उन्होंने अपनी असलियत दिखानी वहां शुरू कर दी थी और उसका नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ताला की टेढ़ी निगाह उनकी तरफ पड़ ही गई।
राजधानी में बैठे आला अफसरों को हालांकि उनके उत्तम कार्यों की सूचनाए तो काफी पहले से प्राप्त हो रही थी। लेकिन इस बार उनको यहां से हटाकर राजधानी बुला ही लिया गया है। की भाई यहीं बैठकर आप अपने उत्तम कार्यों को अंजाम दें ।
तो हमारे कहने का यही मतलब है कि भाई ऊपर वाले की लाठी में बड़ा दम होता है, कुछ समय के लिए तो आप मौज मस्ती कर सकते हैं। लेकिन जब उसकी आंख टेढ़ी होती है तो उसके यहां कोई सिफारिश भी नही चलती है। इसलिए जो भी करो सोच समझ कर करो, अति तो हर चीज की बुरी होती है ।

