18 Jul 2026, Sat

अखाड़ा परिषद के पुनर्गठन के बाद बढ़ी सियासी और धार्मिक हलचल, 8 अखाड़ों के एक जुट हो कर अपना अध्यक्ष व महामन्त्री चुन लेने से कुछ संत हैं परेशान. दोनों गुटों में सुलह के भी दिखाई दे रहे हैं आसार

हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पुनर्गठन के बाद संत समाज के दो गुटों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया था। पुनर्गठित परिषद को लेकर जहां एक पक्ष इसे पूरी तरह वैधानिक बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे असंवैधानिक करार देते हुए लगातार विरोध जता रहा था।

सोमवार को कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर मेला प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक में एक गुट द्वारा शामिल न होने से यह विवाद और गहरा गया था।

यदि पुनर्गठन की वैधानिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो यह भी याद रखना होगा की पिछले वर्ष प्रयागराज कुंभ के दौरान भी निरंजनी गुट के छह अखाड़ों ने अखाड़ा परिषद का पुनर्गठन कर नए पदाधिकारियों की घोषणा की थी।

उस समय भी परिषद में सभी अखाड़ों की सहमति नहीं थी। ऐसे में यदि वर्तमान पुनर्गठन को असंवैधानिक कहा जा रहा है तो प्रयागराज में गठित कार्यकारिणी की वैधता पर भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

बैठक में शामिल होने के बाद आवाहन अखाड़े के श्रीमहंत सत्यगिरि महाराज का बीच बैठक से बाहर निकल जाना भी चर्चा का विषय बना रहा। इसे संत समाज की गरिमा और बैठक की गंभीरता के अनुरूप नहीं माना गया है।

कुछ संत तो यह भी कह रहे हैं की संत का चोला धारण करने वालों को अहंकार त्याग कर सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए कार्य करना चाहिए, धन के बल पर प्राप्त की गई लोकप्रियता कुछ दिन की मेहमान होती है।

उधर निरंजनी अखाड़े के सचिव श्री महंत रविन्द्र पुरी जी ने भी एक बयान देकर कहा है, की सभी 13 अखाडे एक साथ मिलकर 2027 के कुम्भ को सफल बनाने के लिए एक साथ कार्य करेंगे. और कुम्भ मेले को भव्यता के साथ संपन्न कराया जाएगा.

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