नई दिल्ली। मोहन भागवत उस समय कहां थे जब छात्रों को और छात्राओं को बेरहमी से मारा पीटा जा रहा था।
छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें की जा रही थी ,दिल्ली जंतर मंत्र पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं द्वारा केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग व पेपर लीक करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया जा रहा था।

यह धरना प्रदर्शन काफी समय तक चला लेकिन सरकार इन छात्रों से बात करने के लिए तैयार नहीं थी ,और ना ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराना चाहती थी।
जब कई राजनीतिक दलों ने इस प्रकरण को लपक लिया और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी जो सांसद भी हैं, उन्होंने भी इस प्रकरण को संसद में उठाया तब मामला ज्यादा दूर पकड़ता देख बच्चों की बेरहमी से पिटाई की गई, छात्राओं को पीटा गया।

बेरहमी से छात्राओं के प्राइवेट पार्ट तक को नोचा गया।
साथ ही आग में घी का काम हिमाचल से बीजेपी सांसद कंगना रनावत के उस ब्यान ने किया जिसमे मोहतरमा ने छात्राओं को गटर की संज्ञा दे डाली,900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली थी , इस धरना प्रदर्शन से जब सरकार की खूब किरकिरी हो गई तब जाकर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार को लेना पड़ा।
उधर कंगना रनावत मैडम का जहां पूरे देश में विरोध शुरू हो गया है वहीं बीजेपी के विरोध की झलक तो बिहार और मध्य प्रदेश के चुनाव में देखने को मिली ही चुकी है।

इसको देखकर अब बीजेपी व संघ को सोचने पर विवश कर दिया है, की क्या केवल दो लोगों की हठ धर्मी की वजह से पूरी पार्टी कही धीरे-धीरे रसातल में ना पहुंच जाए।
जिसके लिए डैमेज कंट्रोल किया जा रहा है और इसकी कमान संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने संभाली है , मोहन भागवत जी भी अब मान रहे हैं कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है।

छात्रों को भी अपनी बात कहने का पूरा अधिकार था, और सरकार को छात्रों से पहले ही बात करनी चाहिए थी।
लेकिन छात्रों के अभिभावकों की माने तो मोहन भागवत जी उस समय कहां थे जब इन छात्रों को कीले लगे हुए डंडों से पीटा जा रहा था छात्राओं के साथ अभद्रता की जा रही थी।

मोहन भागवत जी इन सब चीजों को नहीं देख रहे थे ,यदि यह सारी बर्बरता मोहन भागवत जी उस समय देख लेते और इस बर्बरता को रोक कर इन छात्रों की बात सुनने के लिए सरकार को विवश करते तो शायद मोहन भागवत जी का कद और ऊपर उठ जाता।
लेकिन अब जब तीर कमान से निकल गया है तब इन सब बातों के करने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है, धर्मेंद्र प्रधान जी का तो इस्तीफा हो गया है, अब विपक्ष गृहमंत्री जी का इस्तीफा भी मांग रहा है गृहमंत्री तो खैर इस्तीफा क्या देंगे।

लेकिन इस प्रकार से संसद का काम काज जो ठप्प पड़ा हुआ है, वह पता नहीं कब शुरू होगा विपक्ष को भी चाहिए की संसद को चलने दें और संसद में ही अपनी बात को रखा जाए , जब भी गृहमंत्री संसद में आए या प्रधानमंत्री जी संसद में आए हैं तब उनके सामने इन विषयों पर चर्चा की जाए लेकिन फिलहाल संसद को चलने दिया जाए।

बीजेपी को भी चाहिए कि कंगना रनावत जैसी बेलगाम बदजुबान सांसद महोदया के मुंह पर टेप लगाए। बीजेपी में और भी महिला सांसद है और भी काफी सांसद है किसी ने इस तरीके के वक्तव्य नहीं दिए हैं, जिस तरीके के कंगना रनावत ने छात्राओं के लिए शब्दों का प्रयोग किया है।


