हरिद्वार, 18 अगस्त। आज के दौर में जब हर दूसरा व्यक्ति तनाव, एंग्जायटी और मानसिक अशांति से जूझ रहा है, तब शांति की तलाश अक्सर लोगों को अध्यात्म की ओर ले जाती है, लेकिन अध्यात्म के नाम पर फैले अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के डर ने युवाओं को इससे दूर कर दिया है। विज्ञान और अध्यात्म के बीच एक बड़ी दूरी बन गई है।
इसी वैचारिक खाई को पाटने का काम कर रहे हैं कानपुर स्थित करौली शंकर महादेव धाम के संस्थापक, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव। उन्होंने तंत्र की सदियों पुरानी भ्रांतियों को तोड़कर इसे एक आधुनिक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया है। धाम द्वारा कराई गई ध्यान साधना से व्यक्ति विचार शुन्यता को प्राप्त करता है, भूत एवं भविष्य के चिंतन न करते हुए वर्त्तमान में रह कर नित्य आनंद की स्थिति को प्राप्त करता है।
श्री करौली शंकर महादेव जी के अनुसार, तंत्र का अर्थ कोई डरावना अनुष्ठान नहीं है। तंत्र की उत्पत्ति व्यवस्था से हुई है। जिस प्रकार देश को चलाने के लिए लोकतंत्र और स्वयं को चलाने के लिए श्स्वतंत्रश् की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार शरीर, मन और ऊर्जा को एक सही दिशा में संरेखित करने की वैज्ञानिक प्रणाली का नाम ही तंत्र है। वे स्पष्ट करते हैं कि जीवन में जहाँ अव्यवस्था है, वहीं दुख है। तंत्र हमें अपने विचारों, रिश्तों और जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करना सिखाता है। यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि अनुशासन का मार्ग है।
अक्सर माना जाता है कि ईश्वर को पाने के लिए घर-परिवार छोड़ना पड़ता है। लेकिन श्री करौली शंकर जी का दर्शन बिल्कुल उलट है। वे आधुनिक समाज को बताते हैं कि परिवार से भागना नहीं, बल्कि परिवार को संभालना असली साधना है।

