देहरादून । नरेश गुप्ता
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वप्न है की उत्तराखंड राज्य भ्रष्टाचार मुक्त व विकास युक्त राज्य बने इसके लिए धामी जी काफी प्रयास और कोशिशे भी कर रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी सनातन धर्म को मानने वाले धार्मिक प्रवृत्ति के ईमानदार और दबंग मुख्यमंत्री माने जाते हैं ।लेकिन मुख्यमंत्री के नीचे काम करने वाले कर्णधार तो दृढ़ निश्चय कर चुके हैं की वह इस राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं भ्रष्टाचार युक्त बनाकर ही दम लेंगे और जब भ्रष्टाचार युक्त यह राज्य बनेगा तभी थोड़ा विकास भी करवा दिया जाएगा ।

अब स्थिति यह हो गई है पूरे राज्य में काम करने वाले ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी बिना पैसे कोई काम नहीं करते आप उनकी कितनी भी शिकायतें करले कहीं भी कर ले उन शिकायतों का भी उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता । लेकिन राज्य के सभी अधिकारी व कर्मचारीयों के साथ ही सभी नेता इस प्रवृत्ति के नहीं है। कुछ लोग भ्रष्टाचार से कन्नी भी काटते हैं और ईमानदारी से काम करते हैं लेकिन ऐसे ईमानदार अधिकारियों व कर्मचारियों व नेताओं की शायद इस राज्य को जरूरत नहीं है।

इसीलिए वह चुपचाप पड़े हुए यह सब खेल देख रहे हैं। कुछ भ्रष्ट लोगों ने तो खुलकर कहना शुरू कर दिया है की भाई हमें ऊपर से टारगेट दिया गया है इस टारगेट को पूरा नहीं करेंगे । तो कुर्सी से विदा कर दिये जायेंगे |अब यह टारगेट किसने दिया है क्योंकि माननीय मुख्यमंत्री जी तो राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते हैं ।तब यह जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं यह किसके लिए धन कमा रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं की यह भ्रष्ट्र अधिकारी और कर्मचारी ऊपर का नाम लेकर नीचे काम लगाने पर तुले हुए हो ।यदि मुख्यमंत्री उचित समझे तो कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर ऐसा टेरर पैदा करें जिससे राज्य में भ्रष्टाचार को समाप्त करने में थोड़ी बहुत तो सहायता मिलेगी क्योंकि पूर्ण रूप से इस राज्य क्या पूरे विश्व में किसी को भी भ्रष्टाचार मुक्त नहीं बनाया जा सकता ।

क्योंकि इस कलयुग में राम राज्य आने में काफी समय लगेगा भले ही हम राम के नाम पर आई सरकार ही चला रहे हैं ।लेकिन राम राज्य से अभी हम काफी दूर है और खास कर ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की करतूतो के कारण । मुख्यमंत्री यदि उत्तराखंड को वास्तव पर्वतीय लोगों के सपनों का राज्य बनाना चाहते है। और राजनीति में सत्ता के सुख की लम्बी पारी खेलना चाहते है ।तो धामी जी को अपने अधीनस्थ अधिकारियों की लगाम कसनी ही होगी।


