29 Jun 2026, Mon

खिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पुनर्गठन के बाद रविवार को नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज और महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने संत-महात्माओं के साथ भगवान दक्षेशवर महादेव का विधिवत रुद्राभिषेक एवं पूजन-अर्चन किया। इस दौरान देश की सुख-समृद्धि, शांति और भारत को विश्वगुरु बनाने की कामना की गई।

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पुनर्गठन के बाद रविवार को नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज और महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने संत-महात्माओं के साथ भगवान दक्षेशवर महादेव का विधिवत रुद्राभिषेक एवं पूजन-अर्चन किया। इस दौरान देश की सुख-समृद्धि, शांति और भारत को विश्वगुरु बनाने की कामना की गई।

पूजन-अर्चन के उपरांत श्री सूरत गिरी बंगला गिरशानंद आश्रम सूरतगिरी बंगला आश्रम में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सम्मान में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्माओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी विश्वेश्वराननंद गिरि महाराज ने अमेरिका से अपना बधाई संदेश भेजते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की मंगलकामना की।

कार्यक्रम में आश्रम के कोठारी स्वामी उमानंद गिरि महाराज ने सभी संतों एवं नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का रुद्राक्ष की मालाएं, पुष्पमालाएं पहनाकर तथा आरती उतारकर पारंपरिक रूप से स्वागत एवं सम्मान किया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि संत समाज सदैव सनातन धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संत समाज और सनातन धर्म के विरुद्ध चलाए जा रहे षड्यंत्रों तथा दुष्प्रचार का संगठित होकर जवाब दिया जाएगा। परिषद इस दिशा में प्रभावी कदम उठाएगी ताकि समाज में भ्रम फैलाने वाली ताकतों को मुंहतोड़ उत्तर मिल सके।

महामंत्री श्रीमहंत महेंद्र राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद सभी अखाड़ों को साथ लेकर समन्वय और एकता के साथ कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ सहित सभी धार्मिक आयोजनों को बेहतर समन्वय के साथ संपन्न कराया जाएगा तथा सनातन धर्म की महान परंपरा को विश्वभर में और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने संत समाज से गंगा, गीता, गायत्री, गौ एवं भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत समाज केवल धार्मिक चेतना का ही नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी महत्वपूर्ण आधार है और समाज को सही दिशा देने में संतों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है।

कार्यक्रम में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, श्री पंचायती अखाड़ा अटल, बैरागी निरमोही अखाड़ा, बैरागी निर्वाणी अखाड़ा, बैरागी दिगंबर अखाड़ा, श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा तथा निर्मल अखाड़े के श्रीमहंत, महामंडलेश्वर, कोठारी एवं अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे। सभी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का अभिनंदन करते हुए उनके नेतृत्व में अखाड़ा परिषद को और अधिक मजबूत बनाने तथा सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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