हरिद्वार
कावड़ मेले का आध्यात्मिक माहौल आज उस समय और गहरा हो गया जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक स्वयं भगवा वस्त्र धारण कर कावड़ के रंग में रंगे नजर आए।
उन्होंने न केवल कावड़ियों के लिए आयोजित भंडारे में भोजन परोसा, बल्कि कांवड़ उठाकर श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन भी किया।
यह सेवा कार्यक्रम आज ज्वालापुर स्थित जटवाड़ा पुल पर कावड़ सेवा दल द्वारा आयोजित किया गया था। सुबह से ही यहां हजारों कावड़ियों की भीड़ उमड़ी हुई थी। इसी बीच डॉ. निशंक का आगमन होते ही पूरे क्षेत्र में जयकारों की गूंज सुनाई दी।
भंडारे में पहुंचते ही डॉ. निशंक ने बिना किसी औपचारिकता के कतार में बैठे कावड़ियों को अपने हाथों से भोजन परोसा। पूड़ी, सब्जी और प्रसाद वितरित करते हुए उन्होंने हर श्रद्धालु से कुशलक्षेम पूछी।

भोजन वितरण के बाद उन्होंने कावड़ियों से बातचीत कर प्रशासन और शासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कावड़ियों ने मार्ग में सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम स्थलों की व्यवस्था को लेकर संतोष व्यक्त किया और शासन-प्रशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
सेवा के बाद डॉ. निशंक ने स्वयं कांवड़ उठाई। गंगाजल से भरी कांवड़ को कंधे पर रखते ही वहां मौजूद कावड़ियों का जोश दोगुना हो गया। उन्होंने कहा कि कावड़ यात्रा केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का भी सबसे बड़ा उदाहरण है।

