25 May 2026, Mon
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परमार्थ निकेतन गंगा तट बना दिव्य व भव्य 11 वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का साक्षी

ऋषिकेश।

विश्व के 25 से अधिक देशों से राजदूत, उच्चायुक्तों और विशिष्ट अतिथियों ने किया सहभाग

ऋषिकेश, 21 जून। परमार्थ निकेेतन गंगा तट पर आज भव्य रूप से विश्व के 25 से अधिक देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों की गरिमामयी उपस्थिति में 11 वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर काॅमन योग प्रोटोकाॅल का अभ्यास परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में आयोजित किया गया।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 11वीं वर्षगांठ “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” की थीम के साथ मनाई जा रही है, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य और सत्य को रेखांकित करती है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य और वैश्विक पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। योग न केवल शरीर को सशक्त करता है और मन को शांत करता है, बल्कि एक जागरूक और जिम्मेदार जीवनशैली को भी प्रेरित करता है।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जब हम स्वयं का ध्यान रखते हैं, तब हम पृथ्वी का भी ध्यान रखना शुरू करते हैं। यही है भारतीय संस्कृति का दिव्य संदेश वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात् पूरी दुनिया एक परिवार है।
स्वामी जी ने कहा कि योग एक प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक साधना है जो पूरे विश्व को भारत की एक अनमोल धरोहर भी है। ‘योग’ अर्थात जोड़ना जिसका तात्पर्य शरीर, मन और चेतना का एकता में विलय।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि योग दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने की एक दिव्य विधा है, जो कर्मों के निष्पादन में कुशलता प्रदान करता है। यह योग की वास्तविक सार्थकता का संदेश देता है। योग केवल शरीर को लचीलापन देने वाला व्यायाम नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है, जिससे व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखता है। योग के अभ्यास से एकाग्रता, धैर्य और निर्णय क्षमता बढ़ती है, जिससे कर्म कुशलता से संपन्न होते हैं। यही योग की शक्ति है, बाहर की हलचल के बीच भीतर की शांति बनाए रखना ही योग है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को अपने 69वें सत्र में भारत द्वारा प्रस्तावित और 177 देशों द्वारा सह-प्रायोजित एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को अपनाते हुए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया।


भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने उस अवसर पर महासभा को संबोधित करते हुए कहा था, योग हमारे प्राचीन परंपरा की अमूल्य देन है। योग मन और शरीर, विचार और कर्म की एकता को समेटे हुए है, यह न केवल व्यायाम है, बल्कि स्वयं, प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ एकत्व की अनुभूति का मार्ग है।
11 वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिव्य अवसर पर आज परमार्थ गंगा तट पर आज प्रातः बाँसुरी वादन के साथ पतंजलि योगसूत्र का पाठ, माननीय प्रधानमंत्री, भारत, श्री नरेन्द्र मोदी जी का योग दिवस पर वीडियो संदेश, विगत वर्षों के प्रेरणादायक संदेश व योगगुरुओं के विचार, योग के विभिन्न स्वरूपों की झलकियाँ, योग की प्रस्तुति एवं पुनरावलोकन, विगत वर्षों के कार्यक्रमों की संक्षिप्त वीडियो क्लिप्स व योग पर आध्यात्मिक विचार का आदान प्रदान किया।

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