भारत के राष्ट्रपति देश के संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष होते हैं। संविधान के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है, लेकिन अधिकांश मामलों में वे प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं। राष्ट्रपति संविधान के संरक्षक, देश के प्रथम नागरिक और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं।
राष्ट्रपति के प्रमुख संवैधानिक अधिकार (शक्तियाँ) निम्नलिखित हैं:
कार्यपालिका (Executive) शक्तियाँ प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं।
प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं।
राज्यों के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), चुनाव आयुक्त, अटॉर्नी जनरल आदि प्रमुख संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ करते हैं।
केंद्र सरकार का समस्त प्रशासन राष्ट्रपति के नाम से चलता है।
विधायी (Legislative) शक्तियाँ
संसद का अधिवेशन बुलाना, स्थगित करना तथा लोकसभा को भंग करना।
संसद द्वारा पारित विधेयकों पर स्वीकृति देना, पुनर्विचार के लिए वापस भेजना (धन विधेयक को छोड़कर) या कुछ मामलों में स्वीकृति रोकना।
संसद का सत्र न होने पर अध्यादेश (Ordinance) जारी करना (अनुच्छेद 123)।
वित्तीय (Financial) शक्तियाँ
राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा के बिना धन विधेयक संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
वार्षिक बजट राष्ट्रपति के नाम से संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
भारत की आकस्मिक निधि (Contingency Fund of India) पर राष्ट्रपति का नियंत्रण होता है।
न्यायिक (Judicial) शक्तियाँ
दया याचिका पर निर्णय लेने का अधिकार।
राष्ट्रपति दंड को क्षमा (Pardon), स्थगित (Reprieve), राहत (Respite), परिहार (Remission), निलंबन (Suspension) या दंड में परिवर्तन (Commutation) कर सकते हैं, विशेष रूप से मृत्यु-दंड सहित कुछ मामलों में।
सैन्य (Military) शक्तियाँ
राष्ट्रपति भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। सेनाध्यक्षों की नियुक्ति करते हैं। युद्ध और शांति की घोषणा संविधान और संसद द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
कूटनीतिक (Diplomatic) शक्तियाँ
भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करते हैं।
राजदूतों और उच्चायुक्तों की नियुक्ति करते हैं।
विदेशी देशों के राजदूतों के प्रत्यय-पत्र (Credentials) स्वीकार करते हैं।
आपातकालीन (Emergency) शक्तियाँ
राष्ट्रपति संविधान के प्रावधानों के अनुसार:
राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352),
राज्य में राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356),
वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)
लागू कर सकते हैं, मंत्रिपरिषद की सलाह और संवैधानिक प्रक्रिया के अधीन। परामर्श संबंधी शक्ति राष्ट्रपति किसी महत्वपूर्ण विधिक या संवैधानिक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकते हैं (अनुच्छेद 143)
महत्वपूर्ण तथ्य:
यद्यपि राष्ट्रपति के पास व्यापक संवैधानिक शक्तियाँ हैं, परंतु अनुच्छेद 74 के अनुसार अधिकांश कार्य वे प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं। इस प्रकार भारत में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद के माध्यम से प्रयोग की जाती है।

