26 Jul 2026, Sun

दुकान गई, प्लॉट गया और किस्मत भी फिसल गई! लंबू ने जैसा किया वैसा ही भुगता, रकम तो मोटी आई, लेकिन कर्जदारों का कर्जा नही चुकाया

हरिद्वार व दक्ष नगरी की गलियों में इन दिनों एक पुराने किस्से की चर्चा खूब तैर रही है। चर्चा एक ऐसे जनाब की है, जो नैतिकता , चरित्र और अधिकारों के बड़े-बड़े भाषण देते नजर आते हैं, लेकिन उनके अतीत की कहानी सुनकर लोग कानों पर हाथ रख लेते हैं।

कहानी शुरू होती है उस दौर से, जब सतपाल ब्रह्मचारी नगर पालिका अध्यक्ष थे। बताते हैं कि जनाब ने अपने बड़े भाई के नाम कनखल की रानी की हवेली में एक दुकान आवंटित करा ली। भाई के निधन के बाद भाई की पत्नी से ऐसा विवाद हुआ कि उसे घर छोड़ना पड़ा।

इसके बाद esa6 जादू चला दुकान किसी व्यक्ति को बेच दी गई। सौदा करीब 14 लाख रुपये में निपटा बताया जाता है।

अब सोचिए, इतने पैसे आए तो उनका क्या हुआ? यहां किस्मत ने ऐसा गुलाटी मारी कि फिल्मी पटकथा भी शर्मा जाए। बताते हैं कि दुकान से आए 14 लाख रुपये शहर के चर्चित कॉलोनाइजर प्रदुमन अग्रवाल को एक प्लॉट के लिए दे दिए गए। लेकिन न प्लॉट मिला, न पैसा वापस आया। उल्टा समय का पहिया ऐसा घूमा कि प्रदुमन अग्रवाल की जेल में मृत्यु हो गई और रकम हवा में उड़ गई।

शहर के चौराहों पर अब लोग चुटकी लेते हुए कहते हैं, “दूसरों की दुकान पर नजर रखने वाले अपनी किस्मत की रजिस्ट्री पढ़ना भूल गए।” यही वजह है कि बुजुर्गों की वह पुरानी कहावत फिर याद आ रही है— “जैसा करोगे, वैसा भरोगे, और इसी धरती पर भरोगे।”

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