25 May 2026, Mon
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संत समाज में मचा घमासान: कंचन गिरि का अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पर बड़ा हमला, बोलीं, “जिसके दामन में दाग हों, वह दूसरों पर उंगली न उठाए

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में संत समाज के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ गई है। साध्वी कंचन गिरि ने एक वीडियो जारी कर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पर गंभीर और तीखे आरोप लगाते हुए संत समाज में नई बहस छेड़ दी है। उनके बयान के बाद संत समाज और अखाड़ों की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कंचन गिरि ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह स्वयं शादीशुदा हैं और अपने परिवार व बच्चों के बारे में कभी कोई बात नहीं छिपातीं। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन जीना कोई अपराध नहीं है, लेकिन कुछ लोग साधु-संत की छवि के पीछे अपने निजी जीवन को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “जिसके खुद के घर कांच के हों, उसे दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।” कंचन गिरि ने दावा किया कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष कथित रूप से साधु जीवन का दिखावा करते हुए गुप्त रूप से पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ साध्वियों को छिपाकर रखा गया है और उनके बच्चे भी हैं। कोई वृंदावन में हैं तो किसी और को कहीं और छिपाकर रखा हुआ है।
वीडियो में कंचन गिरि ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि उन्हें या छोटे अखाड़ों को निशाना बनाया गया तो वह भी खुलकर जवाब देंगी। उन्होंने कहा, “यदि कोई अपने आपको बहुत बड़ा समझकर अभियान चला रहा है तो यह उसकी भूल है। अभिमान में चलने वाले हाथी को गिराने के लिए एक चींटी ही काफी होती है।” उन्होंने कहा कि उनके पास कई लोगों के “काले चिट्ठे” मौजूद हैं और समय आने पर वह सभी सच सामने लाने से पीछे नहीं हटेंगी।
छोटे अखाड़ों को दबाने का आरोप
कंचन गिरि ने आरोप लगाया कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और उनके करीबी लोग छोटे अखाड़ों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सही काम करने वालों पर कार्रवाई की बात की जाती है, जबकि कथित फर्जी बाबाओं और विवादित लोगों को सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे अखाड़ों के संतों की “गर्दन दबाने” की कोशिश की जा रही है, लेकिन ऐसा कभी सफल नहीं होगा। “अभी तक कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो हमारी गर्दन दबा दे,” उन्होंने तीखे अंदाज में कहा।
चक्रपाणि और चित्रगुप्त अखाड़े का भी लिया नाम
अपने बयान में कंचन गिरि ने चक्रपाणि और चित्रगुप्त अखाड़े का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति को पहले फर्जी संत कहा गया, बाद में उसी को जगद्गुरु का सम्मान दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर संत समाज में दोहरे मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, एक ओर कुछ लोगों को फर्जी बताकर बदनाम किया जाता है, जबकि दूसरी ओर उन्हीं लोगों को मंचों पर सम्मानित किया जाता है।
संत समाज में बढ़ सकती है तनातनी
कंचन गिरि के इस बयान के बाद संत समाज में तनातनी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हरिद्वार में पहले भी अखाड़ों और संतों के बीच बयानबाजी होती रही है, लेकिन इस बार मामला निजी आरोपों और गंभीर दावों तक पहुंच गया है। हालांकि, कंचन गिरि द्वारा लगाए गए आरोपों पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष या संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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