देहरादून। तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी ने हरिद्वार नगर निगम के 58 करोड रुपए लगा दिए थे ठिकाने ।
58 करोड रुपए से 35 बीघा जमीन जिसकी कीमत 5 करोड़ भी नहीं थी उसको वरुण चौधरी ने खरीद कर नगर निगम हरिद्वार को 58 करोड़ का लगा दिया था चूना।

इसकी खबर प्रमुखता से चिंगारी सांध्य दैनिक ने प्रकाशित की थी।
खबर प्रकाशित होने के बाद वरुण चौधरी इतने बौखलाए थे की उन्होंने चिंगारी संवाददाता नरेश गुप्ता पर मुकदमा कायम करने की दे दी थी धमकी।
लेकिन अब वरूण चौधरी को बर्खास्त करने की संस्तुति कर दी है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने ,वरुण चौधरी के विरुद्ध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिंगारी सांध्य दैनिक में इस घोटाले की खबर छपने के बाद व नगर निगम हरिद्वार की मेयर व नगर निगम बोर्ड के पार्षदों की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए वरुण चौधरी व तत्कालीन जिलाधिकारी व कुछ अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की थी।

जिसमें तत्कालीन जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह , तत्कालीन एसडीएम हरिद्वार, नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे।
हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है।
प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

