10 Jun 2026, Wed
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उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी मर्डर केस तूल पकड़ता जा रहा है, बीजेपी के ही काफी लोग अब अंकिता भंडारी केश की सीबीआई जांच की खुले आम मांग करने लगे हैं लेकिन सरकार के कानों पर जून नहीं रेंग रही है।

देहरादून । तीरथ व तिरवेन्द्र ने भी की जांच की मांग,इसके अलावा बीजेपी से जुड़ी कई नेत्री भी जांच की कर रही है जांच की मांग।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व बीजेपी के वरिष्ठ नेता तीरथ सिंह व हरिद्वार से सांसद व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तिरवेन्द्र सिंह तो खुले आम इस अंकिता प्रकरण की खुले आम जांच की मांग करते हुए,दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर चुके है, जबकी महिलाएं तो सडको पर उतर कर धरने प्रदर्शन कर रही है।

उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी 2022 में एक रिसॉर्ट में नौकरी करने के लिए आई थी इस रिसोर्ट के मालिक बीजेपी के नेता होने के साथ-साथ राज्य के दर्जाधारी मंत्री थे, इनके रिसोर्ट में अय्याशी का धंधा खुलकर चलता था। ऐसा आम जनता का कहना है ।और इस रिसोर्ट में उत्तराखंड ही नहीं दिल्ली तक के वीवीआइपीओं को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाया करती थी। इन विशेष सुविधाओं के लिए कभी-कभी अंकिता भंडारी को भी इस्तेमाल किया जाता था।

दादा की उम्र के वीवीआईपी के साथ अंकिता भंड़ारी ने हम बिस्तर होने से मना किया तो उसकी हत्या कर दी गई ,या उसने खुद आत्महत्या कर ली।

अंकिता भंडारी ने अपने दादा की उम्र के बीजेपी के एक राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तराखंड के प्रभारी महोदय के साथ हम बिस्तर होने से मना कर दिया था। इसके बाद अंकित भंडारी की हत्या कर दी गई थी,या उसने आत्महत्या की थी, अंकित भंडारी की हत्या के बाद रिसोर्ट के एक कमरे को बुलडोजर से रातों-रात तोड़ दिया गया, यह मामला उस समय तो जैसे तैसे ठंडा पड़ गया था। और दर्जाधारी राज्य मंत्री महोदय के दोनों पुत्र जो बिल्कुल निरंकुश और बेलगाम हो चुके थे, और उनका एक साथी तीन लोगों को जेल भेज दिया गया था ।

तीन साल बाद अंकिता भंड़ारी प्रकरण पुनः सुर्खियों में है, जिसके पीछे बीजेपी के एक पूर्व विधायक जी ही है।

अब यह मामला अभी 15 दिन पहले उस समय सुर्खियों में आया जब भारतीय जनता पार्टी के हरिद्वार के ज्वालापुर सीट से विधायक रह चुके सुरेश राठौड़ व उनकी अपने आप को पत्नी बताने वाली उर्मिला नाम की महिला के साथ ऑडियो और वीडियो पर ऐसी अभद्र भाषा में वरिष्ठ बीजेपी व संघ नेता के बारे में हुई बातों का प्रसारण देश के तमाम लोगों ने देखा ,खासकर उत्तराखंड की जनता में तो सभी लोगों ने इस ऑडियो वीडियो को देखा है ।और लोगों के पास यह ऑडियो वीडियो सुरक्षित भी हैं।

लेकिन हमारे राज्य की पुलिस या प्रशासन के पास यह वीडियो नहीं है ।इसीलिए जिन लोगों के पास यह वीडियो हो ।या तो यह वीडियो प्रशासन को वह लोग उपलब्ध कराए, या जो लोग जिन वीआईपीयो पर अंकिता भंडारी के हत्यारे होने के आरोप लगा रहे हैं। व उनके बारे में सीबीआई जांच कर उन्हें सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं ।

उनसे उत्तराखंड राज्य के मंत्री सुबोध उनियाल राज्यसभा सांसद नरेश बंसल व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भट्ट जी पक्के सबूत मांग रहे हैं। और यह पक्के सबूत उन लोगों से मांगे जा रहे हैं जो धरने प्रदर्शन कर रहे हैं।

पक्के सबूत सुरेश राठौड़ व उर्मिला ही दे सकते है।अंकिता भंड़ारी भी सबूत दे सकती थी,जो अब काल के गाल में समा चुकी हैं।

पक्के सबूत उस व्यक्ति से मांगे जाने चाहिए जिस व्यक्ति ने यह सारे आरोप गट्टू पट्टू और सत्तू पर लगाए हैं, यह सबूत हैं भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ के पास ,उसी ने तो ये रायता फैलाया है। सुरेश राठौड़ से ना तो कोई सवाल किया जा रहा है। ना कोई उसके बारे में कोई बात की जा रही है।

जबकि यह पूरा किया धरा सुरेश राठौड़ का है। सुरेश राठौड़ का फिलहाल कुछ आता पता नहीं है कि वह कहां है। और उर्मिला को भी पुलिस ढूंढ रही है। इस प्रकरण की सच्चाई तक पहुंचने के लिए एसआईटी गठित की गई है। लेकिन एसआईटी को भी इसमें ज्यादा कुछ नहीं मिल रहा है। केवल एक अनजान से व्यक्ति का नाम एसआईटी को मिला है। जो उस दौरान रिजॉर्ट आया था।

अब भगवान जाने के उस रिसोर्ट में उस दिन क्या हुआ था। यह बात तो सुरेश राठौड़ को या अंकित भंडारी को व रिसोर्ट के मालिकों व उन वीआईपीयो पता होगी जिनका नाम इस प्रकरण में लिया जा रहा है ।और नाम ले कौन रहा है भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़, तो ना तो सुरेश राठौड़ से कोई पूछताछ हो रही है और वीआईपीयो से तो पूछताछ करने की हिम्मत राज्य सरकार की है ही नहीं। राज्य सरकार भी समझ चुकी है की यह प्रकरण जल्दी से अब रुकने वाला नहीं हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव में इस अंकिता प्रकरण का खमियाजा बीजेपी को उठाना पड़ेगा

2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाजा निश्चित भुगतना पड़ेगा। उसके बावजूद भी बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने और राज्य के मुख्यमंत्री ने चुप्पी साध रखी है, और इस चुप्पी का करण आम जनता की समझ में नहीं आ रहा है।जबकी सुरेश राठौड़ का दावा तो यहाँ तक है की दुष्यंत गौतम के ऊपर एक नही सात ऐसे ही मामले है।जो हाई कमान की नॉलिज में है।

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