25 May 2026, Mon
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मां मनसा देवी ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल शर्मा की अकूत संपदा की जांच कौन करेगा, मनसा देवी से कोई सैलरी ना मिलने के बावजूद लाखों की आमदनी वाले अनिल शर्मा कि जब कमाई मोटी है, तो इंकम टैक्स भी काफी भरते होंगे, और अब अपने पुत्र को भी मनसा देवी पर स्थापित करने के लिए लगा रहे हैं एड़ी चोटी का जोर

हरिद्वार ।हरिद्वार की सबसे प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर पर प्रतिदिन लाखों रुपए का चढ़ावा आता है ,इस चढ़ावे के रखरखाव की जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल शर्मा के ऊपर है । नकद धनराशी ,नारियलों की बिक्री, सोना चांदी हीरे जवारत सब अनिल शर्मा के संरक्षण में रहते हैं।

अनिल शर्मा प्रति सप्ताह मनसा देवी मंदिर के ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी को अखाड़े जाकर चढ़ावे की धनराशी ,सोना ,हीरे जवाहरात दे आते है। अनिल शर्मा ,ट्र्स्ट के अध्यक्ष जी के विश्वास पात्र है।इस लिए, जितनी शर्मा जी की इच्छा होती है उतना माल दे आते हैं, बाकी का क्या किया जाता है यह अनिल शर्मा को पता होगा। लेकिन मनसा देवी मंदिर के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी अनिल शर्मा से क्या पूरा हिसाब किताब लेते हैं या नहीं यह तो इन दोनों को ही पता होगा ।

लेकिन सच्चाई है की अनिल शर्मा ट्रस्टी होते हुए भी उनको किसी प्रकार का कोई वेतन मनसा देवी मंदिर से नहीं मिलता है। तब भी उनका शाही ठाट बाट , रहन-सहन गाड़ी और नया बंगला जो गंगा पुरी बन रहा है, वह किस तरह की आमदनी से बन रहा है , शायद अनिल शर्मा की कोई फैक्ट्री हो जिसके बारे में किसी को पता न हो और गोपनीय तरीके से चल रही हो ,उसी की कमाई से शायद बंगला बन रहा हो।क्योकी शर्मा जी बड़े ईमानदार व भाग्य के धनी है।

अनिल शर्मा के गोपनीय कारोबार की जांच क्या आयकर विभाग करेगा।

इनका कारोबार क्या है , कहा से लाखों रु महीना की आमदनी है ।तभी तो शहर की पॉश कालोनी में कोठी बन रही है।गाड़ी है , प्लाट है । नकद बैंक बैलेंस भी है ।घर का खर्चा भी है। इसकी जांच क्या आयकर विभाग कर पाएगा आयकर विभाग को चाहिए की अनिल शर्मा जी के इस तरीके के जो कारोबार चल रहे हैं, क्योकी बिना किसी कारोबार के, चार दुकाने तो काली मंदिर के बाहर है।

एक दुकान काली देवी मंदिर के अंदर है। पहले चार दुकान चंडी देवी मंदिर पर भी थी। और मनसा देवी मन्दिर के तो वे मालिक है। और मनसा देवी के नीचे जितना भी नारियल चुन्नी सड़क तक बिकता है सब अनिल शर्मा का बिकता है ।करोड़ों रुपए का खेल है ,लेकिन कागजों में कोई वेतन नही है । कही इसी आमदनी को तो इंकम टैक्स के रूप में तो नही दिखाया जाता हमे पक्के तौर पर पता नहीं है,

पदेन ट्रस्टी कुछ करें।

जिला प्रशासन को चाहिए की वह ऐसी व्यवस्था करें। जो नारियल प्रसाद में श्रद्धालु लेकर आते हैं वह नारियल इन श्रद्धालुओं को वापस किया जाना चाहिए। श्रद्धालु अपने घर ले जाकर प्रसाद के उस नारियल को आसपास के लोगों को वितरित करें या अपने परिवार के लोगो के साथ खाएं, ना की नारियल शर्मा जी की बपौती बन जाये, और नारियल की रिसाइक्लिंग होती रहे।

शर्मा जी के कई गोदाम नीचे भी है। जिनमें नारियल चुन्नी और धोती साड़ी और न जाने क्या-क्या भरा रहता है। यहाँ उसकी पैकिंग चलती रहती है और वह पैकिंग होकर फिर मंदिरों में पहुंचा दिया जाता है। और मंदिरों पर पुनः इस समान को बेच दिया जाता है। हम आयकर विभाग से और जिला प्रशासन से यही कहेंगे की वह इसकी जांच कराए। जिससे मंशा देवी मंदिर पर आने वाले चढ़ावे को डकारने वालो के चेहरे बेनकाब हो सकें।

नमन शर्मा

अनिल शर्मा का पुत्र मोह।

अब तो अनिल शर्मा ने अपने पुत्र को भी मंशा देवी पर ही स्थापित करने के लिए पूरा एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। खासकर अध्यक्ष जी से पूरी वार्ता कर चुके हैं, की जल्दी ही पुत्र नमन शर्मा को मंशा देवी ट्र्स्ट का ट्रस्टी बना दे।उसके बाद तो शर्मा जी की बल्ले बल्ले है।

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