नई दिल्ली
कॉन्फ्रेंस में (AINEC) के सदस्यों ने छोटे और मध्यम आकार के अख़बारों के सामने आ रही चुनौतियों पर गहरी चिंता ज़ाहिर की हैं। ये अख़बार मीडिया का एक अहम हिस्सा हैं और स्थानीय ख़बरों व जानकारी को लोगों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जहाँ बड़े अख़बार मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं, वहीं छोटे और मध्यम अख़बार राज्यों, कस्बों और ज़िलों की सेवा करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि मध्यम और कम आय वाले समुदायों पर असर डालने वाले मुद्दों को उचित कवरेज और जनता का ध्यान मिले।

यह देखा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें साथ ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ कम्युनिकेशन (CBC) – जिसे पहले डायरेक्टरेट ऑफ़ एडवरटाइज़िंग एंड विज़ुअल पब्लिसिटी (DAVP) के नाम से जाना जाता था – की मौजूदा नीतियाँ अक्सर बड़े अख़बारों के पक्ष में होती हैं। नतीजतन, कई छोटे और मध्यम अख़बारों को गंभीर वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके बने रहने और स्थानीय समुदायों की सेवा जारी रखने पर संकट आ जाता है।

इसलिए, यह कॉन्फ्रेंस सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आग्रह करती है कि वह छोटे और मध्यम अख़बारों की शिकायतों और चिंताओं पर उचित ध्यान दे और ऐसे उपाय करे जिनसे सरकारी विज्ञापनों का निष्पक्ष और उचित आवंटन सुनिश्चित हो सके। ज़मीनी स्तर की पत्रकारिता को मज़बूत करने, मीडिया की विविधता को बनाए रखने और इन अख़बारों को जनता की प्रभावी ढंग से सेवा जारी रखने में सक्षम बनाने के लिए इस तरह का समर्थन ज़रूरी है।
प्रस्ताव (RESOLUTION)
वर्ष 2026 में नई दिल्ली में आयोजित अपने वार्षिक अधिवेशन में ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एडिटर्स कॉन्फ्रेंस (AINEC) ने सर्वसम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया:
यह प्रस्तावित किया जाता है कि AINEC के सभी सदस्य देश में व्याप्त असहिष्णुता के वर्तमान वातावरण में मीडिया द्वारा झेली जा रही अत्यधिक कठिनाइयों को स्वीकार करते हैं।
संध्या दैनिक चिंगारी के संपादक डॉ सूर्यमणि रखुवंशी का कॉन्फ्रेंस में उद्बोधन
सम्मेलन गहरी चिंता के साथ यह महसूस करता है कि पत्रकारों पर हमले तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र लेखन पर प्रतिबंध देश के विभिन्न राज्यों में लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

