25 May 2026, Mon
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ऋषिकेश । ऋषिकेश में मिर्गी के उपचार के साथ-साथ अब कैंसर का उपचार भी शुरू कर दिया है डॉक्टर आर के गुप्ता ने, आर के गुप्ता प्रतिबंधित नशीली दवाओं के प्रयोग के आरोप में 7 साल की जेल भी काट चुके हैं।

लेकिन जेल से आने के बाद डॉ साहब ने मिर्गी के उपचार के साथ साथ कैंसर जैसी बीमारी का उपचार भी शुरू कर दिया है।

डॉ गुप्ता ने मिर्गी के उपचार से अरबो रु कमाए है। डॉ गुप्ता जी ने प्रोपर्टी के कारोबार में भी लगा रखा है पैसा।

देवनगरी ऋषिकेश में डॉक्टर आर के गुप्ता का नाम फेमस है डॉक्टर आर के गुप्ता किसी परिचय के मोहताज नहीं है, ऋषिकेश ही नहीं पूरे उत्तराखंड व देश के कई अन्य राज्यों में भी डॉक्टर आर के गुप्ता को लोग मिर्गी का उपचार करने के नाम से जानते हैं। इस मिर्गी के उपचार को करते-करते आर के गुप्ता करोड़ नहीं अरबो रुपए के मालिक बन गए हैं. अब आर के गुप्ता ने कैंसर का उपचार भी शुरू कर दिया है । कैंसर के उपचार के लिए आर के गुप्ता मरीज को आध्यात्मिक रूप से तैयार कर, करते है उपचार

ऋषि केश के ज्यादातर होटल डॉ साहब के पास ।

गंगा किनारे ऋषिकेश के जितने भी होटल हैं ।ज्यादातर होटल आर के गुप्ता ने हायर किए हुए इन्हीं होटलो में कैंसर के मरीजों को रखा जाता है इन मरीजों को गंगाजल पिलाया जाता है ,आरती सुनाई जाती है। भगवान का भजन करने की आदत डाली जाती है ,

दो माह पूर्व डॉ गुप्ता के यहाँ नारकोटिक्स विभाग का पड़ा था छापा, डॉ साहब हो गए थे गायब

डॉ गुप्ता के यहां अभी दो महा पूर्व भी नारकोटेक विभाग ने छापा मारा था, लेकिन ना तो अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान पर आर के गुप्ता मिले और ना ही उनका स्टाफ मिला, शायद आर के गुप्ता को पहले से ही इस छापे की भनक लग गई थी , हार कर नारकोटिक विभाग को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा, और उसके बाद शायद आर के गुप्ता जी की कोई मुलाकात नारकोटिक विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी से निश्चित रूप से हुई होगी क्योंकि उसके बाद कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई है ।

सीमा डेंटल कॉलिज से भी प्रसिद्ध हुए डॉ आर के गुप्ता।

डॉ आर के गुप्ता सीमा डेंटल कॉलेज ऋषिकेश के नाम से भी मशहूर रहे हैं। क्योंकि यह डेंटल कॉलेज उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर स्थापित किया था और उत्तराखंड का एक बड़ा डेंटल कॉलेज है। माना जाता है इस डेंटल कॉलेज का नाम डॉक्टर आर के गुप्ता ने अपनी पत्नी सीमा गुप्ता के नाम पर ही रखा था। सीमा गुप्ता की मृत्यु के बाद डॉक्टर साहब ने तुरंत ही दूसरा विवाह कर लिया, इससे छुब्ध होकर डॉक्टर साहब के युवा पुत्र ने डॉक्टर साहब से एक तरीके से किनारा कर लिया है ।और सीमा डेंटल कॉलेज की कमान डॉक्टर साहब के पुत्र ने अपने हाथों में ले लि है ।

डॉ का रिजॉर्ट भी है, जहाँ सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध है।मोटे मोटे दावँ लगाने के लिए कैसिनो भी है।

डॉ साहब का एक रिसॉर्ट भी है नीरज रिसोर्ट के नाम से, यह भी उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में पड़ता है और यहां आने वाले उद्योगपतियों, धनपतियों को हर वह चीज मुहैया कराई जाती है जिसके उद्योगपति और धनपति शौकीन होते हैं हालांकि शौकीन मिजाज आर के गुप्ता जी भी हैं ।इनकी शौकीन मिज़ाजी के चर्चे भी पूरे ऋषिकेश में लोग चटकारे ले लेकर करते हैं। इस रिजॉर्ट पर केशीनो ,जुआ भी चलता है और रोजाना करोड़ो का जुआ यहा होता है।

रिजॉर्ट पर छापा,लेकिन हुआ कुछ नही।

पिछले दिनों रिजॉर्ट पर छापा भी पड़ा था और यह छापा पुलिस ने डाला था। उत्तराखंड की पुलिस को तो आप जानते ही हैं। पुलिस ने अपना ब्रीफकेस लेकर मामले को रफादफा कर दिया था। क्योंकि पुलिस को भी पता था कि यह मामला राजनेताओं तक पहुचेगा तो वे दूध निकाल लेंगे इसलिए उनसे पहले हम खुद ही निपटा देते हैं। अब यह सारे आरोप डॉक्टर साहब के ऊपर जो लगते हैं कि डॉक्टर साहब अपनी दवाओं में प्रतिबंधित नशीली दवाओं का प्रयोग करते हैं। और यह पुड़िया अपने हाथ से वह मरीज को खिलाते हैं। उसका चार्ज अलग से होता है। लेकिन आज तक कितने मरीज ठीक हुए हैं कितने नहीं यह तो पता नहीं ।

कैंसर का मरीज ठीक करने के नाम पर मोटी रकम की वशूली। डॉ साहब ने मोटी रकम की बात को नकारा।

कैंसर के मरीजो के बारे में भी लोगों का कहना है की डॉ साहब कैंसर का मरीज ठीक करने के नाम पर 15 से 50 लख रुपए तक वसूलते हैं। लेकिन जब डॉक्टर साहब से हमने बात की तो डॉ साहब ने बहुत ही सौम्यता व सरलता के साथ बताया की 50 और 15 लख रुपए वसूलने की बात बिल्कुल सरासर गलत है उनके यहां कैंसर के मरीजों का उपचार होता अवसय है। लेकिन किन्हीं दवाओं से उनका उपचार न करके , केवल आध्यात्मिक रूप से ही उपचार किया जाता है ,और इसके लिए वे केवल ₹80000 मरीज से लेते हैं जबकि मरीज को होटल में ठहरने और खाने-पीने का बिल मरीज के तीमारदारों को या मरीज को देना होता है ।

प्रतिबंधित नशीली दवाओं के प्रयोग को भी नकारा।जबकी 7 वर्ष की जेल काट चुके है डॉ साहब ,नशीली दवाओं के प्रयोग के आरोप में।

अब रही बात नारकोटिक दवा प्रतिबंधित दवाओं के प्रयोग की, मिर्गी के उपचार में इसको भी डॉक्टर साहब साफ शब्दों में नकारते है ।वह कहते हैं कि हमारे यहां इस तरह की किसी दवाई का प्रयोग नहीं किया जाता है। जब उनसे पूछा गया कि जब आपके यहाँ इस तरह की दवाओ का प्रयोग नहीं किया जाता है ।तो राज्य सरकार ने आपके क्लीनिक पर छापा मार कर इस तरह की दवाएं प्रयोग करने का आरोप लगाकर आपको 7 साल के लिए बड़ी हवेली ,यानी जेल क्यो भेज दिया था ।तो आप जब इस तरह की दवाओं का प्रयोग नहीं करते हैं तो फिर आपने राज्य सरकार के विरुद्ध कोई कार्यवाही क्यों नहीं की तो इस पर डॉ साहब का कहना था कोई बात नहीं यह राज्य सरकार का काम है।

वह करती है करें लेकिन हमने उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की है । डॉ साहब को जेल यात्रा का कोई गम नही है।लेकिन वे कहते है की सच्चाई ये है की हम किसी भी प्रतिबंधित दवा का प्रयोग अपनी दावोंओ में नहीं करते है ।अभी दो माह पहले भी डॉ साहब के यहाँ जब नारकोटिक विभाग ने छापा मारा था तब भी डॉ साहब और उनका पूरा स्टाफ गायब हो गया था। जब हमने इस पर उनसे बात की तब वे इस सवाल के जवाब से बचते हुए दिखाई दिए ।और साथ ही यह भी कह दिया कि हम कहते हैं की हमारे यहां कोई भी किसी प्रकार की ऐसी दवा का प्रयोग नहीं होता है जो प्रतिबंधित हो ।

जब हमने पूछा की आपके यहाँ जब इस तरह की किसी दवा का प्रयोग नहीं होता है ।तो फिर आपके यहां जब 2 महीने पहले छापा लगा था, तब आप लोग क्यों गायब हो गए थे। इस पर भी उनका कोई सही उत्तर हमें नहीं मिला। कैंसर के उपचार के बारे में भी उन्होंने यह बात सरासर गलत बताई की हम 15 से 50 लख रुपए वसूलते हैं ।साथ ही उन्होंने मिर्गी के उपचार के बारे में भी स्पष्ट रूप से हमको बताया कि हम किसी भी प्रतिबंधित दवा का उपयोग नहीं करते हैं ।रही बात नीरज रिजॉर्ट पर छापा पड़ने की उसको भी उन्होंने नकार दिया की हमारे यहां इस तरह का कभी कोई छाप नहीं पड़ा है । और न वहाँ कैसिनो चलता है।

कैंसर के 150 मरीज ठीक करने का दावा करते है, डॉ गुप्ता।

डॉक्टर आर के गुप्ता का कहना है कि वह अब तक कैंसर के डेढ़ सौ मरीज का सफल उपचार कर चुके हैं। अब तक करीब डेढ़ सौ मरीज ठीक हो चुके हैं ।अब हम उन 150 की तो बात छोड़िए पांच मरीजों को ही ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं । जिनके हमें नाम मिल जाएं की जो ठीक हुए हो या, मिर्गी के वह 5,10 मरीज मिल जाए जो आज तक ठीक हुए हो। इसके लिए थोड़ी हमें मेहनत करनी पड़ेगी या डॉ साहब से उन मरीजों की सूची लेनी पड़ेगी। डॉक्टर साहब काफी व्यस्त रहते हैं इसलिए उनसे समय मिलने में हमें दिक्कत हो सकती, लेकिन हम प्रयास करेंगे। डॉ साहब से हमारी फोन पर बात हुई है, और उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि हम आपको अपनी सारी दवाई दिखाएंगे और अपने बारे में सारी चीजे हमें बताएंगे ।

के हम इस तरह की किसी भी प्रतिबंधित दवा का उपयोग नहीं करते हैं। लेकिन हमारा यह मानना है कि इन दावों को हमें दिखाने से क्या फायदा होगा । यह दवाई तो डॉक्टर साहब को राज्य सरकार को उस समय दिखानी चाहिए थी। जब वह जेल जा रहे थे। और अभी दो महा पहले जो नारकोटिक विभाग का छापा पड़ा था उन लोगों को दिखानी चाहिए थी की आप अकारण हमारे क्लिनिक को क्यों बदनाम कर रहे हैं। हम इस तरह का कोई काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन डॉ साहब अपनी बात नारकोटिक्स टीम को बताने की बजाय गायब हो गए, इसका डॉक्टर साहब के पास कोई उत्तर नहीं बन रहा था।

न्यायालय जाने से भी बचते है डॉ साहब।

जब हमने डॉ साहब से कहा कि यदि आप सही है तो अपनी बात न्यायालय के समक्ष रख सकते है। लेकिन न्यायालय जाने से डॉ साहब थोड़ा परहेज करते हैं।

मुख्यमंत्री जी डॉ आर, के गुप्ता को तो सम्मान मिलना चाहिए।

हमारा तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कहना है की धामी साहब हमारे राज्य में ऋषिकेश देवभूमि में इतने काबिल डॉक्टर साहब वहां बैठे हुए हैं ।जो मिर्गी के साथ-साथ अब आध्यात्मिक तरीके से मात्र गंगाजल पिलाकर व आरती दिखाकर कैंसर जैसे लाइलाज मर्ज का उपचार सफलता पूर्वक कर रहे हैं ।तो फिर ऐसे व्यक्ति को तो राज्य सरकार को पुरस्कृत करना चाहिए, और ऐसे व्यक्ति की क्षमताओं का उपयोग करते हुए राज्य के और कैंसर मरीजो का उपचार डॉक्टर आर के गुप्ता से करवाना चाहिए।

ज्यादातर संस्थान ट्र्स्ट के नाम

कहा जाता है की डॉक्टर आर के गुप्ता के ज्यादातर संस्थान आर के गुप्ता के ही एक पारिवारिक ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर कर दिए गए हैं जिससे इन संस्थाओं को किसी तरीके का कोई नुकसान ना हो क्योंकि संस्थान ट्रस्ट में रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे। बाकी काम डॉ साहब के मुँहबोले रिश्तेदार सम्भाल लेते है।इनका भी दवाओं का कारोबार है।

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