22 Jul 2026, Wed

हर साल वही हाल: बारिश में जलमग्न हरिद्वार, समाधान अब भी अधूरा

हरिद्वार में हर वर्ष वर्षा के मौसम में पूरा शहर जलमग्न हो जाता है।खासकर चंद्राचार्य चौक, कनखल , ज्वालापुर , भारत माता मंदिर छेत्रों में वर्षा के मौसम में निकलना भारी पड़ता है ।

शहर के नेताओं को इस समस्या से कोई सरोकार नहीं है, अधिकारी बरसात के मौसम से चार माह पूर्व सभी तैयारियां पूरी कर लेने का दावा करते हैं, लेकिन यह तैयारी किस क्षेत्र में होती है, यह तो अधिकारी जानते होंगे फिलहाल तो हर क्षेत्र में हरिद्वार में पानी ही पानी नजर आ रहा है ।


इस बार भी पूरे शहर को एक दिन की भारी वर्षा ने जलमग्न कर दिया है, कुछ मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं पुलिस व जिलाधिकारी ने सड़कों पर उतरकर स्थिति का जायजा तो लिया ही ,लेकिन पुलिस ने उत्कृष्ट कार्य करते हुए सड़क पर चल रहे वाहनों व राहगीरों को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया है।

इसके लिए पुलिस अधीक्षक नगर भी सड़कों पर आ गए, और जिलाधिकारी और उनके साथ कुछ अन्य अधिकारी भी जल भराव का जायजा लेते देखे गए ,और निरंतर अपने फोन पर निगाह लगाए जिलाधिकारी संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देते देखे गए। यह दिशा निर्देश जिला अधिकारी अपनी हर बैठक में पिछले 4 माह से दे रहे हैं, की वर्षा के आने से पूर्व सभी तैयारी पूर्ण कर ली जाए।


पता नहीं अधिकारियों ने या कर्मचारियों ने यह तैयारियां पूर्ण की या नही की फिलहाल तो नगर के अधिकांश छेत्र जल मग्न दिखाई दे रहे हैं।

माननीय मदन कौशिक जी भी इस समस्या का निवारण नही कर पाए


हर वर्ष वर्षा काल मे यही स्थिति हरिद्वार की रहती है, हरिद्वार से लगातार 5 बार से विधायक व मंत्रिमंडल में असरदार मंत्री रह चुके और वर्तमान में भी कैबिनेट मंत्री पद को सुशोभित कर रहे माननीय मदन कौशिक जी को जितनी चिंता चुनाव में अपने मतदाताओं की रहती है, यदि इसकी तुलना में 10% भी चिंता यदि मदन कौशिक जी शहर की कर लेते तो शायद आज इस शहर को इस जल भराव से कुछ तो निजात मिल ही जाती।

एक बार अपने मुख्यमंत्री काल में हरीश रावत ने चंद्राचार्य चौक की जल भराव की समस्या को सुलझाने का प्रयास किया था, जिसके लिए मोटर से खींच कर पानी को नहर में डालने का प्रयास हुआ था। जो अभी भी काम तो कर रहा है,लेकिन वह भी नाकाफी ही साबित हो रहा है,


इस शहर की यह समस्या हर वर्ष की समस्या है, जिस तरीके से जरा सी वर्षा होने पर मुंबई नगरी जगनमग्न हो जाती है, ठीक उसी तर्ज पर तीर्थ नगरी हरिद्वार भी बरसात में जलमग्न ही रहती है । तमाम मकान व दुकानों तक मे पानी प्रवेश कर जाता है ,इस समस्या से शहर की जनता को कब निजात मिलेगी यह कह पाना बहुत कठिन लगता है।

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