22 Jul 2026, Wed

सनातन धर्म को रसातल में पहुँचा रहे हैं, कुछ गेरुआ वस्त्र धारी तथा कथित संत।

शंकराचार्य के पद को भी कर दिया है संदेह के दायरे में, आदि गुरु शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए पूरे भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की थी।

जिसमें पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण इन चारों मठों पर चार शंकराचार्य भी बैठाए गए थे ,इन चारों शंकराचार्य का कार्य हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार व सनातन धर्म को आम जनमानस तक पहुंचने का कार्य था।

लेकिन आज चार नहीं 40 से भी अधिक शंकराचार्य भारतवर्ष में घूम रहे हैं इन शंकराचार्यो को कौन शंकराचार्य बनता है ,कौन इनको शंकराचार्य की उपाधि देता है इसका कोई अता-पता नहीं है, जिसको देखिए शंकराचार्य बना घूम रहा है।

जो असली शंकराचार्य हैं वह आज भी अपने मठों से कम ही निकलते हैं , और राजनीतिक क्षेत्र में भी दखल नही देते हैं, शांतिपूर्वक तरीके से यह असली शंकराचार्य धर्म का प्रचार करते रहते हैं, और भगवान का स्मरण और पूजा पाठ करते रहते हैं । जबकि बाकी के अन्य स्वयम्भू शंकराचार्यो को राजनीति से ही फुर्सत नहीं है । उद्योगपतियों और राजनेताओं के बीच लाइजनिंग का काम इनका कारोबार है ।

साधु संतों में आचार्य महामंडलेश्वर बनने के लिए भी घमासान होता है ,आचार्य महामंडलेश्वर बनने के लिए कोई भी किसी प्रकार की विद्वत्ता की आवश्यकता नहीं है ।आपके पास मोटी रकम होनी चाहिए आप आराम से आचार्य महामंडलेश्वर बन सकते हैं, महामंडलेश्वर बन सकते हैं और मंडलेश्वर बन सकते हैं।

वर्तमान मे सनातन धर्म में जो संतों ने परंपराएं बना रखी हैं उसके अनुसार साधु संत मंडलेश्वर ,महामंडलेश्वर ,आचार्य महामंडलेश्वर का अविवाहित होना व परिवार से दूरी बनाकर रखना अनिवार्य है। लेकिन ऐसा कोई इक्का दुक्का संत या मंडलेश्वर होगा जिसका अपना परिवार या उसका अपना गोपनीय वैवाहिक जीवन नहीं चल रहा हो। अन्यथा सभी की पत्नियां हैं बच्चे हैं। यही बच्चे बड़े होकर गद्दी के उत्तराधिकारी बनते हैं।

इसका खुलासा महिला साध्वियां ही कर देती हैं, जो अखाड़े में मंडलेश्वर बनकर रहती हैं । और महान संतों के कृत्यों को देखती हैं । यह महिला साध्वियां इन आचार्य महामंडलेश्वरों के बारे में ऐसी ऐसी बातें उजागर करती हैं । जिनको सुन्ने के बाद आम जनमानस सोचने पर मजबूर अवश्य हो जाता है। की इनसे अच्छी तो आम जनता ही है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में टीवी न्यूज़ चैनलों पर डिबेट चल रही थी, एक तरफ हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए प्रमोद कृष्ण महाराज जो कलिका पीठ का अपने आप को पीठाधीश्वर बताते हैं ,वह अभी दो तीन साल पहले तक कांग्रेस में घूमा करते थे, लेकिन जब कांग्रेस में उनकी दाल नहीं गली तो उन्होंने बीजेपी के गुणगान करने शुरू कर दिए और उनके ऊपर प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभल में उनकी कलिका पीठ पर पहुंच गए ।

बस उसके बाद तो प्रमोट कृष्ण की मानो लॉटरी लग गई। और प्रमोद कृष्णम के आगे पीछे लोग घूमने लगे । अभी जो डिबेट हुई राम मंदिर चोरी मामले में तो एक तरफ प्रमोद कृष्णम जी थे एक तरफ निर्मोही अखाड़े के एक संत बैठे हुए थे , इन दोनों संतों में इस तरीके से तू तड़ाक और जो जो बातें एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप हो रहे थे, पूरे देश ने सुना है, जिस तरीके से रिक्शा वाले आपस में सवारी ढोने के लिए लड़ते हैं। और अपनी असली औकात पर उतर आते हैं, ठीक ऐसा ही नजारा इन दोनों महापुरुषों के वाक युद्ध में देखने को मिला।

वर्तमान में कुछ युवा कन्याओं में गेरुआ वस्त्र धारण कर सनातन धर्म के प्रचार का प्रचलन देखने को मिल रहा है, ये बात अलग है की इनमें से ज्यादातर कन्याओं को अपने साथ मेकअप करने वाली बीयूटिशिय को रखना अनिवार्य सा होता है। इनमें से कुछ युवा साध्वियाँ तो साधुओं की तरह के नकली बाल भी रखती जब कहि साधू संतों के बीच जाना हो तो नकली बाल सिर पर लगा कर साध्वी बन जाती हैं।

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