देहरादून, नरेश गुप्ता
उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अगर विजय श्री हासिल करनी है तो चुनाव से पूर्व ही पूरी कांग्रेस को एकजुट होकर मैदान में उतरना होगा, और हरीश रावत को आगे रखकर ही मैदान मारा जा सकेगा।
अन्यथा बीजेपी को सत्ता में आने से कोई नहीं रोक पाएगा उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव इस बार बीजेपी और कांग्रेस के लिए करो या मरो की लाइन पर होने जा रहे हैं।

वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, वह पूरे राज्य के हर क्षेत्र में घूम रहे हैं, और ऐसे ऐसे कार्य कर रहे हैं जिससे महिलाएं भी प्रसन्न हो जाएं और पुरुष भी प्रसन्न रहें, साथ ही पुष्कर सिंह धामी पूजा पाठ में भी काफी सक्रिय रहते हैं ,और हर जगह जहां भी पूजा पाठ या देवी या देवता की पूजा होती है वहां पूरी निष्ठा के साथ पूजा करने के लिए पहुंचते हैं ।
लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेता पूरे राज्य में जाना तो दूर अपने अपने पूरे विधानसभा छेत्र में भी नही पहुंच रहे हैं। बिल्ली के भाग्य से छीका टूटने की प्रतीक्षा में हैं , कांग्रेस की हालत यह है की चुनाव में वह किस तरीके से विजयश्री हासिल करेगी ये कोंग्रेसियों को ही नही पता है।

हरीश रावत जिनके बिना उत्तराखंड में जीत हासिल करना कांग्रेस के बूते की बात नहीं है, उन हरीश रावत को कांग्रेसी अलग-थलग करके चल रहे हैं, जबकि हरीश रावत के अलावा उत्तराखंड में अन्य कांग्रेसियों में ऐसा कोई नेता नहीं है जिसके बूते कांग्रेस चुनाव जितने की स्थिति में हो।
यशपाल आर्य ,प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत यह चार नेता तो चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी के दावेदार हैं, लेकिन कांग्रेस को जिताने के लिए एकजुट होने के लिए कोई तैयार नहीं है, चारों नेता चारों दिशाओं में चलते है
ऐसी स्थिति में कांग्रेस तो सत्ता में लाने की जुम्मेदारी कौन उठाएगा इसका जवाब किसी के पास नही है, जबकि आम जनता विपक्ष की ओर टकटकी लगाये देख रही है , कि अगर कॉंग्रेस में कुछ मजबूती दिखाई दे तो वह कांग्रेस को वोट दे

उधर यूकेडी ने अपना अलग राग अलापना शुरू कर दिया है ,लेकिन यूकेडी जो भी नुकसान पहुंचाएगी वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को नुकसान पहुंचाएगी, अकेले किसी एक पार्टी को नुकसान यूकेडी से नहीं होगा, यूकेडी भले ही दावे कुछ भी करे लेकिन केवल दो से तीन सीट यूकेडी राज्य में ला सकती हैं
निर्दलीय भी तीन-चार सीटों पर चुनाव जीत सकते हैं, लेकिन कांग्रेस की अभी तक स्थिति मजबूत दिखाई नहीं दे रही है , कोई भी बड़ा कांग्रेसी नेता दूर दराज के इलाकों में जाने के लिए तो तैयार ही नहीं है
इस काम में हरीश रावत आज भी पूरे राज्य के सभी जनपदों में घूमते रहते हैं, हरीश रावत के बिना उत्तराखंड में कांग्रेस का अपना कोई अस्तित्व दिखाई ही नहीं पड़ता है, अगर कांग्रेस उत्तराखंड में सरवाइव करेगी या जीतेगी तो हरीश रावत के ही बल पर चुनाव जीतेगी
यह बात दिल्ली में बैठे आला कमान को भी समझ लेनी चाहिए, खासकर राहुल गांधी को रही बात राज्य की प्रभारी शैलजा जी की तो शैलजा जी की हालत तो सभी कांग्रेसी जानते हैं

उन्होंने तो हरियाणा में कांग्रेस को सत्ता में आते-आते तिलांजलि दिलवा दी थी, मैडम खुद ही चुनाव के दौरान कोप भवन में जाकर बैठ गई थी , बा मुश्किल एक महीने बाद निकली थी जब रायता पूरी तरह से खिंड चुका था, वे उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी हैं, वे इस राज्य उत्तराखंड की ना तो भौगोलिक स्थिति से परिचित हैं ना उनके पास कहीं इधर-उधर जाने का समय है ।
वह तो जब भी कभी आती है तो देहरादून में अपना एक दो दिन विताकर चली जाती हैं, वह भी तब जब यहां कॉंग्रेस के किसी बड़े नेता का आगमन हो। जैसे राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे साहब का कार्यक्रम हल्द्वानी में था तब आई थी, राहुल गांधी देहरादून आए थे तब आई थी, राहुल गांधी अल्मोड़ा आने वाले थे तब आई थी अन्यथा उन्हें दिल्ली में बहुत काम रहता है ।
ऐसे मे कांग्रेस तो उत्तराखंड में अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार रही है , यह स्थिति राहुल गांधी और सोनिया गांधी को खुद संभालनी होगी, क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे जी तो नाम के अध्यक्ष हैं उनकी तो कोई सुनता नहीं है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष तो खुद इस बात से अंदर खाने काफी दुखी है लेकिन क्या करें रहना तो इन कांग्रेसियों के साथ ही है, ये जो भी गुल खिला रहे हैं वह सब पूरी पार्टी के सामने है, अकेले राहुल गांधी इस कांग्रेस की गाड़ी खींच रहे हैं
उत्तराखंड में बीजेपी को हराने का इस बार पूरा मौका कांग्रेस के पास है , क्योंकि राज्य की जनता कई मुद्दों को लेकर बीजेपी से नाराज है, लेकिन इन मुद्दों को कांग्रेस भुना नहीं पा रही हैं।
कांग्रेस इस तरीके से तो उत्तराखंड की सत्ता में नहीं लौटेगी ,सत्ता में तो तभी लौटेगी जब सारे कांग्रेसी मिलकर एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करेंगे, और बीजेपी की कमियों को आम जनता के बीच जाकर जनता को बतायेंगे , इस समय सबसे ज्वलंत मुद्दा कांग्रेस के पास अंकित भंडारी का है, लेकिन उसको भी बहुत तरीके व कायदे से कांग्रेसी उठा नहीं पा रहे हैं ।
कांग्रेसी अगर सरकार के विरुद्ध मुद्दों को पूरे राज्य में हर मतदाता तक नहीं पहुंचा पाएंगी तो फिर सत्ता में नहीं आएंगे, और यह मौका अगर कांग्रेसी इस बार चूक गए तो फिर आगे तो कोई मौका मिलेगा या नहीं मिलेगा इसको तो कह पाना मुश्किल है।

