देहरादून ,उत्तराखंड से कांग्रेस को निपटाने में कामयाब होते दिखाई दे रहे हैं,कुमारी शैलजा व वेणुगोपाल पहले से ही आपसी झगड़ों से जूझ रही उत्तराखंड कांग्रेस में इन दोनों की हरकतें आग में घी का काम कर रहे हैं ।
उत्तराखंड में यूं तो पहले से ही कांग्रेस दर्जन भर गुटों में बटी हुई है ,चाहे जिले की राजनीति हो या राजधानी की राजनीति हो या किसी कस्बे की राजनीति हो किसी भी धरना प्रदर्शन के लिए कोंग्रेसी अपनी-अपनी दुकान अलग सजाते हैं।

कभी यह इकट्ठे नहीं होते हैं इसको बढ़ावा देने का काम उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा बखूबी कर रही हैं , कुमारी शैलजा ने उत्तराखंड में कई लोगों को टिकट देने का लॉलीपॉप भी दे दिया है यह लोग गाए बगाहे समय समय पर शैलजा की चरण वंदना के लिए हरियाणा और दिल्ली की यात्रा भी करते रहते हैं।

कॉंग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत के बिना उत्तराखंड में कॉंग्रेस का कोई वजूद नही है।यदि कॉंग्रेस हाई कमान राहुल गांधी हरीश रावत के बिना उत्तराखंड के स्वप्न देख रहे हैं तो वे गलत फहमी न पालें और कुमारी शैलजा व वेणुगोपसल जैसे महान नेताओं से पीछा छुड़ा ले तो कॉंग्रेस के लिए ज्यादा मुफ़ीद रहेगा।

वर्तमान में कांग्रेस की इस आपसी कलह को देखते हुए बीजेपी की सरकार एक बार पुनः उत्तराखंड में बनती दिखाई दे रही है ,और यदि उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार पुनः बन जाती है तो मुख्यमंत्री भी पुष्कर सिंह धामी को ही बनाया जाएगा ,क्योंकि जब उनको चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बना दिया गया था , तो तीसरी बार चुनाव जीतने के बाद तो मुख्यमंत्री की कुर्सी से उन्हें कोई हिला नहीं पाएगा ।

हालांकि बीजेपी में भी काफी अंतर कलह है लेकिन यह अंतर कलह कोई बड़ा कारनामा दिखा पाने की स्थिति में इसलिए नहीं है, क्योंकि विपक्ष नाम की तो कोई चीज उत्तराखंड में है ही नहीं इसलिए बीजेपी की बल्ले बल्ले निश्चित दिखाई दे रही है।


