हरिद्वार जनपद में नशीले कैप्सूल व गोलियों के साथ-साथ इंजेक्शन पुलिस निरंतर पकड़ती रहती है , ड्रग विभाग नींद से नहीं जाग रहा है ,यह नशीले कैप्सूल और गोलियां हरिद्वार के सिडकुल की कुछ फार्मा कंपनियों व हरिद्वार जनपद के ही भगवानपुर की कुछ फार्मा कंपनियों में ही बनते हैं।
और मार्केट में आते हैं हरिद्वार जनपद में करीब 300 फार्मा कंपनियां है इन फार्मा कंपनियों में से अधिकांश कंपनियां जो हरिद्वार के सिडकुल में व भगवानपुर में स्थापित है, उनमें से अधिकांश में नशीली गोलिया व कैप्सूल के अलावा इंजेक्शन बनते हैं ,साथ ही ओवर रेटिंग की नकली दवाइयां भी यहां से ऑर्डर देकर बनवाई जाती है, जो बाजार मे महंगे दामों पर बेची जाती है।
ऐसा नही की इस सब गोरख धंधे की जानकारी ड्रग विभाग को न हो लेकिन ड्रग विभाग के पास इतना समय नहीं है कि वह इन तथाकथित फार्मा कंपनियों पर छापे मार कर उनके लाइसेंस कैंसिल कराए, और इन पर ताले डलवाए हरिद्वार जनपद की पुलिस जरूर नशीले कैप्सूल नशीली गोलियां वह नशीले इंजेक्शन अक्सर मेडिकल स्टोर पर छापे मारकर पकड़ती रहती है और मेडिकल स्टोर के मालिकों को जेल भेजती रहती है।
यह नशीले कैप्सूल , गोलियां व इंजेक्शन स्कूल के नौजवान छात्रों को सप्लाई करने का धंधा पूरे जनपद हरिद्वार, देहरादून, उधम सिंह नगर ,हल्द्वानी में फैल रहा है । बेहद मुनाफे के इस कारोबार ने राज्य के ग्रामीण छेत्रों में भी अपनी जड़ें जमा ली हैं देखना है के उत्तराखंड सरकार का नशा मुक्त उत्तराखंड का नारा कब सरकार होगा।

