हरिद्वार।
लखनऊ के लाक्षागृह में हुई 15 बच्चों की मौत वह 9 छात्रों के घायल होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की नींद खुली है । चार लोगों को सस्पेंड किया गया है, चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह सब घटनाएं गिरफ्तारी और सस्पेंशन तभी होते हैं जब कम से कम दर्जन भर या इससे ज्यादा लोगों की बलि चढ़ जाए । और अभागे इंसान अकारण ही काल के गाल में समा जाएं ।
इससे पहले ना तो शासन और ना प्रशासन बिल्कुल नहीं जागता है। आप चाहे कितना ही शोर मचाते रहे, कितना ही लिखते रहे, कितना ही कुछ कहते रहे ,क्योंकि अगर आप ज्यादा लिखेंगे। तो इस तरीके के अवैध निर्माण करवाने वालों की खिलाफत को दरकिनार करते हुए , अवैध निर्माण करवाने वालों के पैरोंकार खड़े हो जाएंगे। और वह सही बात कहने वाले को ही गलत ठहराना शुरू कर देंगे। यह इस देश की परंपरा चल पड़ी है।

हरिद्वार में काम से कम 500 से अधिक इसी तरीके के लाक्षागृह बने हुए हैं, पूरे श्रवण नाथ नगर में 100, 100 गज के अंदर होटल गेस्ट हाउस बनकर तैयार हो गए है, यदि कोई घटना हो जाए तो ना तो निकल कर जाने का कोई रास्ता है। और ना कोई सेफ्टी पॉइंट है ,अग्निशमन विभाग ने भी पता नहीं इनको किस तरीके से नो ऑब्जेक्शन यानी एनओसी दे रखी है। या नहीं दे रखी है, दे रखी है तो क्यों दे रखी है, किस नियम के आधार पर दे रखी है ।और नहीं दे रखी है तो उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हो रही है।
हरिद्वार विकास प्राधिकरण की तो बात ही छोड़ दीजिएगा ।उसको इस शहर से कुछ लेना देना नहीं है। लेना-देना है तो केवल नोटों की गड्डियां उनको चाहिए, हरिद्वार में बहादराबाद से लेकर शांतिकुंज तक जितने भी होटल धर्मशालाएं गेस्ट हाउस, हॉस्टल अस्पताल बने हुए हैं। आधे से ज्यादा अवैध निर्माण है।
यह अवैध निर्माण एक दिन में तो हुए नहीं होंगे निश्चय ही हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के कारिंदों की सहमति से ही हुए होंगे। लेकिन इन कारिंदों का कुछ बिगड़ता इसलिए नहीं है। कि जिन लोगों ने विगत 25 से भी अधिक वर्षों में इन निर्माणों को मंजूरी दी है । उनमें से अधिकांश तो रिटायर हो गए हैं। या कहीं और स्थानांतरण होकर चले गए हैं।

अब जो वर्तमान मे नई टीम आई है ।उस टीम को इन सब सारी चीजों से रूबरू होना पड़ रहा है। ये टीम मानती हैं। की वास्तव में इस शहर का जो नक्शा है। उसका स्वरूप ही बदल दिया गया है। अब तो केवल और केवल या तो कंपाउंडिंग होगी या फिर कोई और नियम हरिद्वार विकास प्राधिकरण के पास हो तो वह जानते होंगे। ना इनको एनजीटी का भय है , हरिद्वार शहर में श्रवण नाथ नगर एरिया ऐसा एरिया है। जो शहर का सबसे महंगा एरिया कहलाता है।
इस जगह जमीन की कीमत इस समय भी 30 से 35 हजार रुपए फुट जमीन है। अब लोगों ने यहां से अपने मकान तो लगभग एक तरीके से बंद कर दिए हैं। सारे मकानो को गेस्ट हाउस में और होटल में तब्दील कर दिया है। अगर उत्तराखंड सरकार जागती है। और इस तरफ ध्यान देती है, तो हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण इस तरीके के निर्माण पर अंकुश लगाए, और ऐसे निर्माणों की भविष्य में परमिशन न दी जाए। तभी शायद कुछ बचाव इस शहर का हो सकता है ।अन्यथा यह शहर भी एक तरीके से लाक्षागृह से कम दिखाई नहीं पड़ता है।

